मुख्यपृष्ठनए समाचारअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आदि योगी शिव की नगरी काशी रही योगमय...गंगा...

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आदि योगी शिव की नगरी काशी रही योगमय…गंगा घाटों सहित जगह-जगह योग की रही धूम

उमेश गुप्ता / वाराणसी

आदि योगी बाबा विश्वनाथ और मां गंगा की नगरी का मनुष्य के स्वस्थ जीवन से आदिकाल से संबंध है। योग दिवस पर आयोजन के क्रम में काशी विश्वनाथ की नगरी में मां गंगा की लहरों पर क्रूज पर जहां योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन का संदेश लोगों ने दिया वहीं गंगा के घाटों पर भी योग के माध्यम से उत्तम स्वास्थ्य के लिए योग को अपनाने पर जोर दिया गया।
यहीं काशीपति वामक विरेचक पंचकर्म तथा काय चिकित्सा में निपुण थे। महान भारतीय चिकित्सक सुश्रुत काशी में ही शल्य चिकित्सा का अभ्यास करते थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘सुश्रुत संहिता’ को भी यहीं संकलित किया था। ऐसी ही निरोगी काया देने वाली काशी ने रविवार को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मां गंगा के अर्द्धचंद्राकार तट पर सुबहे बनारस का नजारा ही कुछ और था।
गंगा का किनारा, मां की कलकल करती लहरें और सूरज की लाली किरणें और घाटों पर योग की मुद्राएं काशीवासियों को ऐसी आकर्षित की कि एक श्रृंखला बनी जो असिघाट से 84 घाट होते हुए नमो घाट तक पहुंच गई। श्री काशी विश्वनाथ का प्रांगण में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पुजारियों, कर्मचारियों और अधिकारियों ने योग किया।
इसी प्रकार शहर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। नमो घाट पर पूर्व मंत्री विधायक डा. नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मैदान में स्टांप मंत्री रवींद्र जायसवाल के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने योग किया।
इसी प्रकार गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल भवन चौकाघाट, महात्मा बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली मूलगंध कुटी विहार परिसर, नगर निगम के पार्कों, आयुष चिकित्सालयों, विश्वविद्यालयों, कालेजों, स्कूलों और ग्राम पंचायतों के पंचायत भवनों में भी सामूहिक योग हुआ। कुछ अन्य स्थानों पर प्रभु नारायण इंटर कालेज, पारस वाटिका बीएलडब्ल्यू, सेवापुरी विकास खंड कार्यालय परिसर, नेशनल इंटर कालेज पिंडरा और प्राथमिक विद्यालय अजगरा में जनप्रनिधियों के नेतृत्व में आयोजन हुआ।
गंगा की अविरलता-निर्मलता और घाट किनारे स्वच्छता के संकल्प को साकार करने के लिए नमामि गंगे की टीम ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दशाश्वमेध घाट के सामने जलयोग किया। गंगा में जलयोग के दौरान प्राणायाम, वृक्षासन, ताड़ासन, अनुलोम-विलोम, गरुड़ासन, सूर्य नमस्कार जैसे जल में किए जाने वाले तमाम योग क्रियाओं का प्रदर्शन कर सदस्यों ने जल संरक्षण एवं विश्वकल्याण की कामना की। गंगा की लहरों पर शिव स्तुति, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, द्वादश ज्योतिर्लिंग श्लोक एवं गंगाष्टकम का पाठ करके योग साधना भी की गई ।

अन्य समाचार

पिता