तड़का : कविता श्रीवास्तव
हिमालय की गोद में बसा नेपाल आज मुश्किलों के दौर से गुजर रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा से ग्लेशियर टूट कर बहने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया। बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। हजारों लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण है। इस त्रासदी ने नेपाल के सामने तत्काल राहत और लंबे समय के पुनर्वास और पुनर्निर्माण का सवाल खड़ा कर दिया है। ऐसे समय में नेपाल को आज भारत सहित पूरे विश्व समुदाय के सहयोग की आवश्यकता है। भारत ने राहत और सहायता भेजकर पड़ोसी धर्म निभाया है। लेकिन नेपाल को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी आर्थिक, तकनीकी और मानवीय सहयोग जरूरी होगा। नेपाल की समस्या सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की नहीं है। यह हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों से जुड़े बढ़ते खतरों की चेतावनी भी है। इसलिए नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना होगा। दुनिया के नक्शे पर नेपाल की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय, संस्कृति, धार्मिक विरासत और मेहमाननवाजी के कारण भी है। भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां के मंदिर, बौद्ध मठ, पर्व-त्योहार, लोक परंपराएं और लोगों की आत्मीय आवभगत पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। नेपाल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, तीर्थयात्रा, होटल, परिवहन, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है। इसलिए पर्यटन को बढ़ावा देते हुए दुनिया के लोगों को नेपाल जाना चाहिए, वहां की संस्कृति को समझना चाहिए और स्थानीय व्यवसायों को समर्थन देना चाहिए। हालांकि, जहां अभी सुरक्षा संबंधी खतरा है, वहां यात्रा से बचना जरूरी है। अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी नेपाल से हैं। उन्होंने कहा है कि नेपाल को सिर्फ आपदाओं और मुश्किलों से जूझनेवाले देश के रूप में नहीं जाना जाना चाहिए। नेपाल की पहचान उसके हिमालय, खूबसूरत मौसम, प्रकृति, संस्कृति, परंपराओं और शानदार लोगों से भी होनी चाहिए। उन्होंने दुनिया से नेपाल की यात्रा फिर शुरू करने की अपील करते हुए पर्यटन को नेपाल की ‘जीवनरेखा’ बताया। वाकई, आज नेपाल को केवल संवेदना नहीं, साझेदारी की जरूरत है। भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है, अब विश्व समुदाय को भी नेपाल के पुनर्निर्माण में आगे आना चाहिए। राहत, पुनर्वास और विकास के साथ सुरक्षित पर्यटन को बढ़ावा देकर नेपाल को फिर से खड़ा करने में दुनिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नेपाल, सचमुच सिर्फ पहाड़ों का देश नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, प्रकृति और मानवीय आत्मीयता की धरती है। आज इस खूबसूरत देश को फिर से मुस्कुराने के लिए पूरी दुनिया के साथ की जरूरत है।
