एम एम एस
साउथ कोरिया का जिओला कस्बा दो महिलाएं एक-दूसरे का हाथ थामे एक स्थानीय प्रशासनिक कार्यालय में पहुंचें। अधिकारी उन्हें कुछ कागजात देता है और दोनों उन कागजात पर हस्ताक्षर करती हैं। दोनों की तस्वीरें ली जाती हैं। वह अधिकारी दोनों को बधाई देते हुए कहता है, ‘आप दोनों मेरी बधाई स्वीकार करें, आज से आप दोनों मां बेटी के रिश्ते में बंध गई हैं। आपको आनेवाले भविष्य की ढेर सारी शुभकामनाएं।’
दक्षिण कोरिया की इन दो मां बेटियों का नाम है सियो- रैन और ईओ-री। मां की उम्र है ४३ साल और बेटी की उम्र है ३८ साल। दरअसल, सियो-रैन ने ईओ-री को कानूनी तौर पर अपनी बेटी माना है। उनकी गोद ली हुई बेटी सिर्फ पांच साल छोटी है। ये दोनों महिलाएं सात वर्षों से सबसे अच्छी दोस्त और रूममेट रही हैं।
सियो- रैन ने दक्षिण कोरिया के सख्त पारिवारिक कानून के तहत खुद एक परिवार साबित करने के लिए ईओ- री को गोद लिया है। कानून के अनुसार, केवल ब्लड रिलेशन, पुरुष और महिला के बीच विवाह और गोद लेने को ही परिवार के रूप में मान्यता दी जाती है। सख्त जेंडर रोल और पुरुष प्रधान पारिवारिक संस्कृति दक्षिण कोरिया की प्राचीन संस्कृति का गहरा हिस्सा है, लेकिन हाल के कुछ सालों में दक्षिण कोरियाई लोगों ने इन मानदंडों को चुनौती देना शुरू कर दिया है। वे सरकार पर परिवार की परिभाषा को फिर से लिखने पर जोर दे रहे हैं। जैसे अविवाहित जोड़े या दोस्त का एक साथ रहना। इस तरह रहनेवाले जोड़े अब पारंपरिक परिवार इकाइयों के लिए कानूनी तौर पर उपलब्ध अधिकारों और सेवाओं की मांग कर रहे हैं। सच तो यह है कि कोरियन महिलाएं अब यह नहीं चाहती कि वह परिवार की चाकरी करते हुए अपनी जिंदगी गुजार दें। महिलाएं अक्सर इस मामले में सबसे आगे हैं, ‘बिना शादी वाली महिलाओं’ की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, जो शादी करने और परिवार की देखभाल करने के पारंपरिक दबाव को खारिज करते हुए अकेले रहना पसंद करती हैं। सिओ-रैन और ईओ-री का यह नया परिवार इस बदलाव का एक उदाहरण है।
छोटी उम्र से ही सियो-रैन को पता था कि वह शादी नहीं करना चाहती थी, क्योंकि उन्होंने अपनी मां को परिवार की सेवा में दिन-रात खटते हुए देखा था, जिसे खुद के लिए वक्त नहीं था। उन्हें हमेशा यह दुख सालता रहा की उनके पिता ने, जो एक कट्टर पितृसत्तात्मक व्यक्ति थे और उनके परिवार ने उनकी मां का कभी कोई आभार नहीं जताया। उन्हें याद है एक दिन उनकी मां ने उनसे कहा था कि वह कभी नहीं चाहती कि सियो-रैन को भी उनकी तरह जिंदगी गुजारनी पड़े।
कानूनी तौर पर मां-बेटी बन जाने के बाद सियो-रैन और ईओ- री दोनों के परिवारों ने उनकी जीवनशैली को स्वीकार कर लिया है। दोनो महिलाएं संयुक्त रूप से अपने घर की मालकिन हैं और उन्हें समान कानूनी सुरक्षा और अधिकार हैं।
सियो-रैन के लिए पुरुष प्रधान समाज में अकेले रहना आसान नहीं था। उसने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी शुरू की, लेकिन अकेला रहना हमेशा उसके लिए सिर-दर्द बना रहा। उसे लोगों के ताने मिलते, शादियों के प्रपोजल मिलते। कई बार तो वह पुरुषों का शिकार बनते बनते बच गई। अंत में सिओ- रैन शहर छोड़कर दूर-दराज इस ग्रामीण कस्बे में आकर रहने लगी।
यहीं उनकी मुलाकात ईओ-री से हुई। वह भी अकेली महिला थी और शादी और परिवार नामक संस्था से बेहद खफा थी। यहीं पर दोनों मिलीं और दोनों के विचार मिले। दोनों ने एक ही कमरे में रहना तय किया, लेकिन कानूनी अड़चन के चलते दोनों ने अपने रिश्ते को मां-बेटी का नया रूप दे दिया। सियो-रैन जब भी परेशान होती हैं, उन्हें अपनी मां का आशीर्वाद याद आता है,
‘तुम दोनों को इस बात की बिल्कुल भी परवाह करने की जरूरत नहीं है कि दुनिया और दूसरे क्या कहते हैं। बस, अपना जीवन पूरी तरह जियो।’
२०२३ में सियो-रैन ने अपनी एडॉप्शन की कहानी ‘आई एडॉप्टेड ए प्रâेंड’ को संस्मरण के रूप में पेश किया। यह देश का पहला मामला है, जिसकी खबर आम लोगों तक पहुंच गई, जिसमें एक वयस्क ने परिवार बनाने के लिए एक दोस्त को गोद लिया है। लेकिन पारंपरिक पारिवारिक इकाई के बाहर नई जीवनशैली की चाह रखनेवाले और उसका समर्थन करनेवाले दक्षिण कोरियाई लोगों की तादाद बढ़ रही है। पिछले साल लगभग ३५ प्रâीजर लोग फिर सब लोग इस नई पारिवारिक जीवन शैली को अडॉप्ट कर चुके हैं।
कोरोना लॉकडाउन के दौरान सियोल की टेलीविजन राइटर, ग्वाक मिन-जी हफ्ते में एक बार, अपना पॉडकास्ट, ‘बेहोन्से’ रिकॉर्ड करती हैं। कोरियाई शब्दों में ‘बिहोन’ का मतलब (कोई शादी नहीं या स्वेच्छा से अविवाहित)’ और ‘सेसांग’ (दुनिया) है।
‘बिना शादी वाली’ ३८ वर्षीया मिन-जी के अनुसार, ‘हम अभी भी अल्पसंख्यक हैं, जिनका मीडिया में काफी कम प्रतिनिधित्व है। मेरा लक्ष्य हमारे रोजमर्रा के जीवन की कहानियों को साझा करके उन लोगों तक संदेश पहुंचाना है, जिनको लगता है कि शादी करना दुनिया का एकमात्र सही ऑप्शन है और जब तक आप अमीर और सफल नहीं होते हैं, तब तक एक अकेल्ाी महिला बने रहना अनुचित है, मैं यह दिखाना चाहती थी कि यहां कई एकल महिलाएं हैं जो सांसारिक, सामान्य जीवन जी रही हैं और यह बिल्कुल ठीक है!’
