सोम मिश्रा “शिवम”
फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के जन्मदिन के अवसर पर बॉलीवुड पर मौजूद रेडिटर्स एक साथ आए और सुपरस्टार के शानदार करियर का जश्न मनाया। उन्होंने अपने पसंदीदा किरदारों को याद किया और इस पर बहस की कि आखिर कौन-सा रोल सचमुच ‘किंग ऑफ बॉलीवुड’ की पहचान बन गया। यह थ्रेड एक भावनात्मक श्रद्धांजलि बन गया-जिसमें पुरानी यादें, प्रशंसा और फैंस के जोश से भरे विचार शामिल थे।
ऑडियंस की पसंद
थ्रेड का सबसे ऊपर आया कमेंट था-‘कभी हाँ कभी ना’ के सुनील को एसआरके के सबसे प्यारे और सच्चे परफॉर्मेंस में से एक बताया गया।
एक रेडिटर ने लिखा, “सुनील जितना हकीकत के करीब कोई किरदार नहीं था- एक लड़का जो प्यार में है और अपनी मोहब्बत के लिए कुछ भी कर सकता है, चाहे इसके लिए उसे थोड़ा शरारती ही क्यों न बनना पड़े।”
दूसरों ने भी सहमति जताई कि यह “बेहद खूबसूरत फिल्म” थी और “एसआरके का अभिनय कमाल का था।”
कई लोगों का मानना था कि शाहरुख की सबसे यादगार भूमिकाएँ वही थीं जहाँ उन्होंने एक कमजोर, सहज और भावनात्मक इंसान का किरदार निभाया-न कि केवल बड़े रोमांटिक हीरो का।
एक अन्य रेडिटर ने ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में उनके कॉमिक रोल की तारीफ़ करते हुए लिखा – “मुझे पता है ये थोड़ा अलग चुनाव है, लेकिन राहुल के रूप में वह इतने मज़ेदार और प्यारे थे! मुझे उनके कॉमेडी रोल्स बहुत पसंद हैं।”
यादों का सैलाब
रेडिटर्स ने ९० के दशक के एसआरके के जादू को फिर से महसूस किया -डीडीएलजे के राज, कुछ कुछ होता है के राहुल, और कल हो ना हो के अमान जैसे किरदारों को याद करते हुए।
एक फैन ने लिखा,“बचपन में मेरे फेवरेट किरदार ‘ओम शांति ओम’ के दोनों ओम, डीडीएलजे के राज और केकेएचएच के राहुल थे। लेकिन अब, बड़े होने पर मुझे ‘चक दे इंडिया’ के कबीर खान, ‘स्वदेस’ के मोहन, ‘पहेली’ के भूत और ‘वीर-ज़ारा’ के वीर बहुत पसंद हैं — वह हर रूप में इतने रोमांटिक और आकर्षक लगते हैं।”
एक ‘लवर बॉय’ से ‘लेजेंड’ तक का सफर
दिलचस्प बात यह रही कि कई रेडिटर्स ने एसआरके के करियर के विकास पर बात की-कैसे उन्होंने सिर्फ एक आदर्श रोमांटिक हीरो से आगे बढ़कर गहराई और आत्मजागरूकता से भरे किरदार निभाए, जैसे ‘चक दे इंडिया’, ‘स्वदेस’ और ‘जवान’ में।
एक रेडिटर ने लिखा कि ‘चक दे इंडिया’ में उनका अभिनय “नेशनल अवॉर्ड के लायक” था, जबकि दूसरे ने कहा कि ‘माय नेम इज़ खान’ “उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन” है।
