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सावन के दूसरे सोमवार को काशी के हजारों यादव बंधुओं ने बीएचयू स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में किया जलाभिषेक, सुरक्षा के कड़े प्रबंध

उमेश गुप्ता / वाराणसी

सावन के दूसरे सोमवार को काशी में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सीर गोवर्धन के करीब पांच हजार यादव बंधुओं का समूह अस्सी घाट से गंगाजल लेकर बीएचयू स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक कर घर-परिवार की सुख-समृद्धि और लोकमंगल की कामना की। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे।
यादव बंधु सबसे पहले सुबह अस्सी घाट पहुंचे। यहां मां गंगा में स्नान करने के बाद विधि-विधान से गंगा पूजन किया। इसके बाद गगरी और घड़ों में गंगाजल भरा। गंगाजल लेकर श्रद्धालुओं का समूह बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगाते रहे।
अस्सी घाट से गंगाजल लेकर यादव बंधु केदार घाट पहुंचे। यहां भी जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद सभी बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और बाबा का गंगाजल से अभिषेक किया। मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज के कल्याण की कामना की।
सीर गोवर्धन के यादव बंधुओं की ओर से सावन में बीएचयू विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक की यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि यह कई दशकों से चली आ रही है। सीर गोवर्धन निवासी सुनील कुमार यादव ने बताया कि मंदिर के निर्माण के बाद से ही यादव बंधु सावन में बाबा का जलाभिषेक करते आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सावन के पहले सोमवार को पुराने विश्वनाथ मंदिर और दूसरे सोमवार को बीएचयू स्थित नए विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने की परंपरा है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल बड़ी संख्या में यादव बंधु शामिल होते हैं।
सावन के दूसरे सोमवार पर बीएचयू विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के बाहर लंबी कतार लगी रही। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के साथ बीएचयू परिसर और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे।

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