-एसआईआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर
-चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे गंभीर सवाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
चुनाव में गड़बड़ी और विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं और उनकी शुचिता बचाने के लिए संवैधानिक अदालतें मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकतीं। चुनाव प्रक्रिया में सामान्यत: न्यायिक हस्तक्षेप से परहेज किया जाता है, लेकिन जब असंवैधानिक या अवैध तरीकों से चुनाव को प्रभावित करने की आशंका हो, तब अदालत के हाथ बंधे नहीं हैं। पीठ ने कहा कि जब प्रथम दृष्टया ऐसी संभावना हो कि नामांकन में बाधा डालकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है, तो संवैधानिक अदालतें चुप नहीं रह सकतीं।
आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि हिंसा और बिगड़ी कानून-व्यवस्था के कारण उसके करीब दो-तिहाई उम्मीदवार शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में नामांकन दाखिल नहीं कर सके। पार्टी ने पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले में प्रथम दृष्टया आधार पाते हुए राज्य चुनाव आयोग को नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही उम्मीदवारों की अंतिम सूची २१ अक्टूबर को जारी करने के बजाय २३ अक्टूबर तक टालने को कहा।
चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया अपने हाथ में लेना नहीं, बल्कि संबंधित संवैधानिक संस्था से शिकायत पर निष्पक्ष विचार सुनिश्चित कराना है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद जारी है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विपक्ष की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह रुख अहम है।
पीठ ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं और नामांकन प्रक्रिया इसकी अहम कड़ी है। विपक्षी दल की ओर से पेश वीडियो और अन्य दस्तावेजों को देखते हुए अदालत न्यायिक समीक्षा से आंखें नहीं मूंद सकती। चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास कायम रखना संवैधानिक लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है।
