-सरनाईक भाऊ, ई दशहरा बा कि कुर्सी उखाड़ने का मुहूर्त?
दशहरे पर रावण दहन की तैयारी चल रही थी, मगर महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर अलग ही उखाड़बाजी शुरू हो गई! शिंदे गुट के मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार को एलान कर दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत बढ़ाकर एकनाथ शिंदे को दोबारा मुख्यमंत्री बनाएंगे! मतलब फडणवीस को विदाई!
अरे सरनाईक भाऊ, गजबे हो गइल! अभी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं। भाजपा और शिंदे की टुकड़ी मिलकर सरकार चला रही हैं। खैर, सहयोगी टुकड़ी के मंत्री ने दशहरे पर अपने मन की आस और भविष्य के कथित मुख्यमंत्री का सपना सार्वजनिक कर दिया है!
सरनाईक ने माना कि फिलहाल पर्याप्त संख्याबल नहीं है, इसलिए शिंदे उपमुख्यमंत्री हैं। साथ ही दावा किया कि शिंदे को फिर मुख्यमंत्री बनाना जनता की इच्छा है। कौन-सा सर्वे देखकर आए हो भइया। जनता की इच्छा का पता चुनाव से चलेगा या मंत्री जी के बयान से?
वैसे हर पार्टी को अपना मुख्यमंत्री बनाने का सपना देखने का अधिकार है। पर पहले ढंग से पार्टी तो बनाओ। चिह्न और नाम चुराकर बड़े-बड़े सपने देखना ठीक नहीं। गठबंधन में रहते हुए ऐसे सपनों की सार्वजनिक घोषणा से सवाल तो उठेंगे!
एक तरफ महायुति की एकता, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सहयोगी की नजर!
अब फडणवीस भाऊ सोच रहे होंगे कि सरकार तो हमारी चल रही है, लेकिन भविष्य की कुर्सी की बुकिंग अभी से शुरू हो गई! ये दशहरे पर मेरी कुर्सी का ही दहन करने निकले हैं। गौर करिए! किसान को पानी चाहिए, खेत को राहत चाहिए, परिवार को सहायता चाहिए। लेकिन राजनीतिक मंचों पर मुख्यमंत्री की कुर्सी का सपना जवान हो रहा है!
अरे सरनाईक भाऊ, किसानों की चिंता के बीच मुख्यमंत्री बनाने का बिगुल! ई महायुति सठिया गइल का… कि दशहरे पर रावण से पहले कुर्सी की राजनीति का पुतला खड़ा हो गइल बा?
