– सड़क किनारे परेशान मिले ८४ वर्षीय एंथनी को मिला आसरा
-सजग नागरिक की पहचान से अपनों तक पहुंचे बुजुर्ग
सुरेश गोलानी / मुंबई
आधुनिक तकनीक अगर सही हाथों में हो और उसके साथ इंसानियत का मेल हो जाए, तो वह किसी के उजड़े हुए घर को फिर से बसा सकती है। ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला मामला मीरा-भायंदर से सामने आया है, जहां सोशल मीडिया (व्हॉट्सऐप) की ताकत, पुलिस की सजगता और आम नागरिकों की तत्परता से एक ८४ वर्षीय लापता बुजुर्ग एंथनी डिसूजा सही-सलामत अपने परिवार से मिल सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोरीवली-पश्चिम के आई.सी. कॉलोनी स्थित प्रथमेश अपार्टमेंट में रहने वाले एंथनी डिसूजा बीते रविवार सुबह करीब ७ बजे से लापता हो गए थे। बढ़ती उम्र और याददाश्त कमजोर होने की वजह से वह रास्ता भूल गए और भटकते हुए भायंदर इलाके में पहुंच गए। रात करीब ८ बजे बुजुर्ग को एक सुनसान सड़क के किनारे परेशान हालत में देख रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के हेड कांस्टेबल राजकुमार बघेल ने तत्परता दिखाई। उन्होंने न सिर्फ बुजुर्ग को सम्मानपूर्वक अपने क्वार्टर लाया, बल्कि उन्हें खाना खिलाकर रात में सोने की जगह भी दी। अगले दिन सुबह उन्होंने खुद रिक्शा करके बुजुर्ग के घर को तलाशने की कोशिश शुरू कर दी। तलाश असफल होने के बाद बुजुर्ग को मीरा रोड थाने की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मेघना बुरांडे के सुपुर्द किया गया। इस दौरान बुजुर्ग के परिवार वालों ने बोरिवली पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के अलावा सोशल मीडिया पर संदेश भी प्रसारित किए। लापता बुजुर्ग की तस्वीर सोशल मीडिया और व्हॉट्सऐप ग्रुप्स पर तेजी से वायरल हो रही थी। इसी बीच स्थानीय सजग नागरिक जतिन दाढीच ने व्हॉट्सऐप पर वायरल मैसेज को देखा और एंथनी अंकल के परिवार की पहचान कर तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस ने बिना वक्त गंवाए बुजुर्ग को उनके बेहद चिंतित परिवार के स्वाधीन कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में राजकुमार बघेल और जतिन दाढीच के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता सजी आई पी और पूर्व कांग्रेस नगरसेविका मार्लिन दिसा ने अहम भूमिका निभाई। अपने बुजुर्ग पिता को सही-सलामत वापस पाकर परिवार की आंखों में आंसू छलक आए।
