मुख्यपृष्ठखेलआउट ऑफ पवेलियन : नस्लवाद की शिकार महिला फुटबॉलर

आउट ऑफ पवेलियन : नस्लवाद की शिकार महिला फुटबॉलर

अमिताभ श्रीवास्तव

ऐसा नहीं है कि काले-गोरे का भेद मिट गया हो। दुनिया आज भी इससे हताहत है। विकसित देशों की बात कहें या ऐसे लोगों की, जिन्होंने दुनिया में भले ही नाम कर लिया हो, किंतु नस्लवाद उनके पीछे पड़ा ही रहता है। अब देखिए न, इंग्लैंड यूं तो अंग्रेजों का देश है मगर यहां भी नस्लभेद चरम पर है। इंग्लैंड की ही स्टार फुटबॉल खिलाड़ी जेस कार्टर को नस्लवाद का शिकार होना पड़ा है। उन्होंने साफ कहा है कि यूईएफए महिला यूरो के दौरान उन्हें ऑनलाइन घिनौने नस्लवादी दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा। इंग्लैंड के लिए ४९ मैच खेल चुकीं लायनसेज डिफेंडर जेस कार्टर ने घोषणा की है कि वह सोशल मीडिया से दूर हो जाएंगी। इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में २७ वर्षीय इस खिलाड़ी ने कहा, ‘टूर्नामेंट की शुरुआत से ही मुझे काफी नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। हालांकि, मेरा मानना है कि प्रत्येक प्रशंसक को प्रदर्शन और परिणाम पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूं और न ही मुझे लगता है कि किसी के रूप या नस्ल को निशाना बनाना ठीक है।’ उन्होंने कहा कि अपनी सुरक्षा के लिए वो पीछे हट रही हैं, ताकि टीम की हरसंभव मदद करने पर वो अपना ध्यान केंद्रित रख सकें।’ जेस ने स्पष्ट किया कि उम्मीद है कि खुलकर बोलने से इस तरह की गाली लिखने वाले लोग दोबारा सोचेंगे, ताकि दूसरों को इसका सामना न करना पड़े।’
स्त्री विरोधी जेवियर?
यह भी कितना अजीब है कि एक तरफ कोई महिला खिलाड़ी नस्लवाद की शिकार है तो कोई दिग्गज खिलाड़ी महिलाओं को लेकर विरोध कर रहा है, जबकि आज महिलाएं हर क्षेत्र में झंडे गाड़ रही हैं। जेवियर हर्नांडेज फुटबॉल के स्टार हैं, जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ लैंगिक भेदभावपूर्ण टिप्पणी करके प्रशंसकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। मैनचेस्टर यूनाइटेड के इस पूर्व स्टार ने दावा किया कि महिलाओं को अपना घर देखना चाहिए। ३७ वर्षीय हर्नांडेज ने कहा कि महिलाओं को सफाई, घर के रखरखाव आदि के बारे में सोचना चाहिए। चिचारिटो के नाम से प्रसिद्ध जेवियर का मानना है कि महिलाएं समाज को ‘अतिसंवेदनशील’ बना रही हैं। उन्होंने यह चौंकाने वाली बात एक वीडियो में कही, जिसे उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं, आप असफल हो रही हैं। आप समाज को अतिसंवेदनशील बनाकर पुरुषत्व का उन्मूलन कर रही हैं। अपनी स्त्री ऊर्जा को अपनाएं, पोषण करें, देखभाल करें, घर का रखरखाव करें, जो कि हम पुरुषों के लिए सबसे कीमती जगह है।’ उसने आगे लिखा, ‘महिला होने से मत डरो, अपने आपको उस आदमी के नेतृत्व में रहने दो जो केवल तुम्हें खुश देखना चाहता है, क्योंकि हम तुम्हारे बिना स्वर्ग को नहीं जानते।’ इतना लिखते ही कई लोगों ने जेवियर को महिला विरोधी कहना शुरू कर दिया। जबकि जेवियर को लगता है स्त्री और पुरुष के अपने-अपने विभाग हैं, जो सुचारु रूप से चलेंगे तो समाज का उद्धार होगा। परंतु आज के युग में ऐसा कहना आक्रोश का सामना करने जैसा हो जाता है, जो जेवियर कर रहा है।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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