मुख्यपृष्ठनए समाचारमगध प्रक्षेत्र की अनदेखी बर्दास्त नहीं करेंगे मगध वासी-कांग्रेस

मगध प्रक्षेत्र की अनदेखी बर्दास्त नहीं करेंगे मगध वासी-कांग्रेस

  अनिल मिश्र / पटना

बिहार की राजधानी पटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण मगध प्रमंडल मुख्यालय गयाजी को जहां एक ओर बिहार से झारखंड राज्य के विभाजन के उपरांत एकीकृत बिहार के तरह रांची के तर्ज़ पर गयाजी को बिहार का दूसरा राजधानी बनाने की मांग वर्षों से जारी है, तो दूसरी ओर राज्य की सम्राट सरकार सन 2019 से मगध प्रक्षेत्र पुलिस के लिए सृजित आई जी के पद को सात वर्षों बाद समाप्त कर फिर डीआईजी पद करने से मगध वासियों में भयानक आक्रोश है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, टिंकू गिरी, राम प्रमोद सिंह, खिजीर हायात, अशोक राम, सुनील कुमार पासवान, आदि ने कहा कि बिहार सरकार के गृह विभाग द्वारा 29 जुलाई को जारी पत्र में मगध प्रक्षेत्र के आई जी का पद समाप्त कर दिया गया है, जो मगध प्रमंडल और अति प्राचीन, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपना स्थान रखने वाला गयाजी का प्रमोशन की जगह डिमोशन है। इस बीच इन सभी नेताओं ने कहा कि मगध प्रमंडल जो भौगोलिक दृष्टीकोण इसका ज्यादा भूभाग में पहाड़, जंगल है, साथ ही साथ यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र भी है, जिसके चलते पूर्व के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में मगध प्रक्षेत्र में डी आई जी के जगह आई जी का पद सृजित किया गया था। इधर जब से मगध प्रक्षेत्र के आई जी विकास वैभव बने हैं, तब से मगध के लोगों में खुशी और सकून मिल रहा है कि उन्हें किसी प्रकार की पुलिसिया कार्य हेतु तुरंत निष्पादन हो रहा है, लेकिन जब से आईजी पद समाप्त होने की चिट्ठी सरकार द्वारा जारी हुई है, आमजनों में भारी निराशा है। इस बीच इन सभी नेताओं ने कहा कि इससे पहले भी यहां जब अरविंद पांडेय डी आई जी थे तथा आमजनों के बीच बेहतर कार्य करने लगे तथा मगधवासियों द्वारा इनकी कार्यो की सराहना किए जाने लगे तो एका-एक इनका भी प्रमोशन की बातें कह कर तत्कालीन सरकार हटा दिया था, और अब जब आई जी विकास वैभव द्वारा बेहतर कार्य किया जा रहा है, तो मगध से आई जी पद को समाप्त कर दिया गया। इस संबंध में इन नेताओं ने मगध प्रक्षेत्र से आई जी पद समाप्त करने के खिलाफ 6 अगस्त को कॉंग्रेस पार्टी महाधरना आयोजित कर सम्राट सरकार से इस निर्णय को वापस लेने हेतु ज्ञापन भी दिया जाएगा।

अन्य समाचार