मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा: किसी का हौसला बढ़ाने में क्या जाता है?

फलसफा: किसी का हौसला बढ़ाने में क्या जाता है?

सना खान

एक कंपनी में दो कर्मचारी काम करते थे। दोनों मेहनती थे और अपने काम को पूरी लगन से करते थे। एक दिन उनमें से एक कर्मचारी को प्रमोशन मिला। वह बहुत खुश था। वर्षों की मेहनत के बाद उसे उसकी सफलता मिली थी। उसने यह खुशी अपने सहकर्मियों के साथ साझा की और सोशल मीडिया पर भी अपनी उपलब्धि के बारे में लिखा। लेकिन उसकी उम्मीद के विपरीत, बहुत कम लोगों ने उसे बधाई दी। कुछ लोगों ने पोस्ट देखी, लेकिन आगे बढ़ गए। कुछ ने सोचा, ‘बाद में शुभकामनाएं दे देंगे,’ और कुछ ने बिल्कुल प्रतिक्रिया नहीं दी।
उसे बधाइयों की संख्या से ज्यादा इस बात पर अजीब लगा कि जिन लोगों के साथ उसने वर्षों काम किया, जिनके साथ उसने अपने अनुभव और संघर्ष साझा किए, उनमें से कई लोगों ने उसकी खुशी में शामिल होना भी जरूरी नहीं समझा। सच तो यह है कि हम सभी चाहते हैं कि हमारी मेहनत को कोई देखे, हमारी कोशिशों को कोई समझे और हमारी सफलता पर कोई दिल से खुश हो।
लेकिन फिर भी एक सवाल अक्सर मन में आता है, जब कोई अपनी खुशी, अपनी उपलब्धि या अपनी मेहनत का परिणाम साझा करता है, तो उसे प्रोत्साहित करने में आखिर हमारा क्या जाता है?
अक्सर यह भी देखने को मिलता है कि अगर वही पोस्ट किसी गलती, विवाद या आलोचना से जुड़ी होती, तो प्रतिक्रियाएं तुरंत आने लगतीं। लोग अपनी राय देने, टिप्पणी करने और चर्चा करने में देर नहीं लगाते। फिर जब बात किसी की मेहनत, सफलता या खुशी की हो, तो हम इतने खामोश क्यों हो जाते हैं? अगर आलोचना करनी होती, तो शायद शब्दों की कमी नहीं पड़ती, लेकिन जब किसी का हौसला बढ़ाने की बात आती है, तो हम अक्सर पीछे हट जाते हैं। किसी की सफलता पर ‘बधाई हो’ लिखने में, उसकी मेहनत की सराहना करने में या उसके लिए दो अच्छे शब्द कहने में हमारा कुछ नहीं जाता। लेकिन वही छोटे-से शब्द सामने वाले के लिए बहुत मायने रख सकते हैं।
ताने देने में लोगों का क्या जाता है,
मगर हौसला बढ़ाने में क्या जाता है।
हो सकता है आपके दो सच्चे शब्द,
किसी का खोया विश्वास लौटा जाता है।
आलोचक तो हर मोड़ पर मिल जाते हैं,
मगर हमदर्द कम ही नजर आते हैं।
किसी की खुशी में शामिल होकर तो देखिए,
एक छोटा-सा प्रोत्साहन भी कमाल कर जाता है।

अन्य समाचार