-आयुष्मान योजना में `१.७९ करोड़ का घोटाला
-३६१ फर्जी मरीज दिखाकर सरकारी खजाना लूटा
सामना संवाददाता / मुंबई
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। वर्ली पुलिस ने नासिक के ३ अस्पतालों के खिलाफ तकरीबन दो करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन अस्पतालों ने ३६१ फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम लेकर सरकार से पैसा निकाला। स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस सोसायटी के सीईओ चंद्रकांत विभूते की शिकायत पर वर्ली पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। जांच में पता चला कि २०२४ से २०२६ के बीच सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के तहत ३६१ मामलों में ऐसे मरीजों को ‘इलाज मिला’ दिखाया गया, जिनका वास्तव में कोई इलाज ही नहीं हुआ। आरोपियों ने मरीजों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर जीवनदायी पोर्टल पर फर्जी रिकॉर्ड अपलोड किए और ऑनलाइन बीमा क्लेम सबमिट कर दिए, जिससे सरकारी खजाने को रु.१.७९ करोड़ का नुकसान हुआ। स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस सोसाइटी की जांच में २०२४-२०२६ के बीच पूरे राज्य में १६,००० संदिग्ध क्लेम मिले, जिनमें से ९,५०० अकेले नासिक जिले के थे। अब तक नासिक के ५ अस्पतालों का पैनल रद्द किया जा चुका है।
आयुष्मान भारत घोटाला कैसे होता है?
अस्पताल असली मरीजों के आधार/राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सिस्टम में नाम डालते हैं। पोर्टल पर सर्जरी, ऑपरेशन या भर्ती दिखाकर क्लेम फाइल किया जाता है, जबकि मरीज आया ही नहीं होता। डिस्चार्ज समरी, बिल, रिपोर्ट सब फर्जी बनाकर जीवनदायी पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। क्लेम पास होते ही सरकार से सीधा पैसा अस्पताल के खाते में आ जाता है। नतीजा असली गरीब मरीजों का हक मर जाता है और सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता है।
