मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : बिहार में बयानबाजी का बवंडर!

पटना की पॉलिटिक्स : बिहार में बयानबाजी का बवंडर!

-अरुण कुमार गुप्ता

बिहार की राजनीति में नेताओं के बयानों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर तीखी टिप्पणी की, तो भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए पलटवार किया। दोनों पक्षों की बयानबाजी ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने १० अक्टूबर को एमएलसी चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, ‘अगर अपराधियों को गोली ही मारना है, तो सम्राट चौधरी से बड़ा अपराधी कौन है?’ यह टिप्पणी मुख्यमंत्री की अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कथित एनकाउंटर संबंधी बयानबाजी के संदर्भ में की गई थी। प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए और उनके खिलाफ पुराने आपराधिक मामलों का जिक्र किया। प्रशांत किशोर की टिप्पणी पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ हिंसक भाषा के इस्तेमाल को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
‘नीतीश के नाम पर वोट, सम्राट को कुर्सी!’
बिहार की राजनीति में एक बार फिर प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए सरकार को निशाने पर लिया है। जमुई में आयोजित स्नातक संवाद के दौरान जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने आगामी विधान परिषद चुनाव को केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार और व्यवस्था से जवाब मांगने का अवसर बताया। उनके निशाने पर रोजगार, शिक्षकों का वेतनमान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान भी रहे। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि एनडीए के नेता नीतीश कुमार के नाम पर वोट मांग रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज पर भी मतदाताओं को सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि २३ अक्टूबर को होने वाला चुनाव सरकार बनाने या गिराने का चुनाव नहीं है, बल्कि व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का मौका है। पीके ने यह भी कहा कि शिक्षकों, वित्त रहित शिक्षकों और स्नातक बेरोजगारों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में केवल जाति और मुफ्त अनाज के नाम पर वोट मांगना आसान नहीं होगा।
नौ हत्याओं के बयान से घिरे अनंत सिंह!
बिहार की राजनीति में जदयू विधायक अनंत सिंह के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मोकामा के विधायक ने पहले दावा किया कि नीतीश कुमार का साथ देते हुए उन्होंने नौ लोगों की हत्या करवाई, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद सफाई दी कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार का समर्थन करने के कारण लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में उनके नौ करीबी लोगों की हत्या हुई थी। दोनों बयानों के बीच अंतर ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अनंत सिंह ने १६ अक्टूबर को एक साक्षात्कार में नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने राजनीतिक संबंधों और पार्टी के लिए किए गए कथित त्याग का जिक्र किया। इसी दौरान उनके बयान से यह अर्थ निकला कि उन्होंने नीतीश कुमार का साथ देते हुए नौ लोगों की हत्या करवाई। विवाद बढ़ने पर उन्होंने कहा कि उनका आशय यह था कि नीतीश कुमार का समर्थन करने के कारण उनके नौ साथियों की हत्या हुई थी। उन्होंने खुद पर गोली चलाए जाने और परिवार को हुए नुकसान का भी जिक्र किया।

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