हिमांशु राज
रायबरेली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को लेकर वायरल हुआ विवादित पोस्टर भारत की राजनीति में प्रतीकवाद और गठबंधन की नाटकीयता को उजागर करता है। इस पोस्टर में इन तीनों नेताओं की तुलना हिंदू धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की गई है, जिसे सपा के प्रदेश सचिव राहुल निर्मल बागी द्वारा लगवाया गया माना जाता है। पोस्टर में संकटग्रस्त जनता की अंतिम आस कहकर इस गठबंधन को ‘कलयुग के देवता’ के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो राजनीतिक संदेश और गठबंधन की मजबूती दोनों का प्रतीक है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पोस्टर महागठबंधन की चुनावी रणनीति और नेताओं की भूमिका को प्रदर्शित करता है। बिहार में तेजस्वी यादव की मुख्यमंत्री के रूप में संभावित छवि को समर्थन देना, राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के धुरी नेता के रूप में स्थापित करना और अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश में केंद्रीय भूमिका को दर्शाना इसका लक्ष्य है। यह गठबंधन के भीतर सत्ता के समीकरणों और राजनीतिक संतुलन को समझाने की कोशिश भी है। वहीं बीजेपी ने इस पोस्टर को धार्मिक भावनाओं का अपमान और राजनीतिक चालाकी बताया है। भाजपा नेताओं ने इसे गठबंधन की ‘चाटुकारिता’ और सनातन धर्म के अपमान के रूप में फौरी प्रतिक्रिया दी, जिससे सियासी तनाव बढ़ गया। इस विवाद ने रायबरेली की राजनीति को गर्मा दिया है, जहां राहुल गांधी के दौरे के पहले ही माहौल चुनौतीपूर्ण हो गया है। भारतीय राजनीति में धर्म और प्रतीकों के उपयोग की यह कहानी पुरानी है, जहां चुनावी रणनीतियों में संवेदनशील विषयों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। रायबरेली का यह पोस्टर केवल सियासी प्रचार नहीं बल्कि गठबंधन की एकता, उसकी चुनावी महत्वाकांक्षा और सत्ता के लिए तगड़ी रणनीति का प्रतिबिंब है। आने वाले चुनावों में इसका प्रभाव वैâसा होगा, यह राजनीतिक विश्लेषकों और मतदाताओं दोनों के लिए अहम रहेगा।
