सामना संवाददाता / मुंबई
मानसून की दस्तक से पहले पश्चिम रेलवे ने तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि नालों की सफाई, हाई-वैâपेसिटी पंप, ड्रोन मॉनिटरिंग और हाईटेक सिस्टम के जरिए इस बार बारिश के दौरान लोकल सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन मुंबईकरों की नजर अब दावों पर नहीं, पहली तेज बारिश पर टिकी है।
मुंबई आज भी उन कड़वे अनुभवों को नहीं भूली है, जब कुछ घंटों की बारिश ने पूरी लोकल व्यवस्था को ठप कर दिया था। स्टेशन तालाब बन गए थे और लाखों यात्री घंटों ट्रेनों में फंसे रहे। हर साल करोड़ों रुपए खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली मूसलाधार बारिश के साथ ही ‘मुंबई की लाइफलाइन’ लड़खड़ाती नजर आती है।
पश्चिम रेलवे के अनुसार ५८ पुलियों की सफाई का काम किया गया है, लेकिन खुद रेलवे मान रहा है कि अभी भी लगभग १० प्रतिशत काम बाकी है। यानी मानसून सिर पर है और तैयारियां अब भी अधूरी हैं। करीब ६० किलोमीटर नालों की सफाई का दावा भी किया गया है, मगर माटुंगा रोड, वसई रोड और अन्य जलभराव वाले इलाकों को लेकर यात्रियों की चिंता बरकरार है।
रेलवे ने १२६ हाई-वैâपेसिटी पंप लगाने, एससीएडीए सिस्टम, डिजिटल रेन गेज और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल की बात कही है। हालांकि बीते वर्षों में भारी बारिश के दौरान यही पंप और तकनीक नाकाम साबित होते रहे हैं।
रेल प्रशासन एससीएडीए सिस्टम, डिजिटल रेन गेज और ड्रोन तकनीक जैसी हाईटेक शब्दावली जरूर इस्तेमाल की जा रही है, मगर यात्रियों को राहत सिर्फ कागजों में मिलती दिखाई देती है। रेलवे ने मलबा हटाने के लिए ४८० विशेष ट्रेन फेरे चलाने का दावा किया है। इसके बावजूद ट्रैक किनारे कचरा और गंदगी की समस्या आज भी कई इलाकों में जस की तस बनी हुई है।
