बुलाकी शर्मा राजस्थान
-सवाल करणआळै माथै सवाल करणो सही है कांई गुरुदेव?
आपांरी भारतीय ग्यान परंपरा में सवाल-जवाब नै भोत जरूरी मान्यो गयो है वत्स। प्रश्नोपनिषद तो सवाल-जवाब नै लेय’र ई है। पिप्पलाद मुनि सूं छव रिसी-मुनि सवाल करै अर बे जवाब देवै। सवाल नै ग्यान रो द्वार मान्यो गयो है। फेर थारै मन में ओ सवाल कियां जळम्यो, इण रो खुलासो कर तावैâ थारी शंका रो समाधान करियो जा सवैâ, वत्स।
अबार रै माहौल सूं म्हारै मन में ओ सवाल खदबद कर रैयो है गुरुदेव। आप तो म्हांनै परिप्रश्न बार-बार प्रश्न पूछण सारू प्रेरणा देवो अर फरमाओ वैâ अर्जुन रै सवाल करियां ही भगवान स्री क्रिसण बीं री शंकावां रो निराकरण करियो, बीं नै उपदेश दियो जणै गीता रो ग्यान आखै मुलक रो मार्ग दरसण कर रैयो है।
फेर थूं ओ सवाल कियां करियो वत्स वैâ सवाल करण आळै नै जवाब देवण री ठौड़ बीं सूं ओ सवाल करियो जावै वैâ थूं सवाल क्यूं करियो? आदि शंकराचार्य, मंडन मिश्र जिसी विभूतियां सवाल-जवाब शास्त्रार्थ कर’र ई नूंवा सिद्धान्त स्थापित करिया हा।
म्हैं आपनै अरज करी नीं गुरुदेव कै आज रै माहौल सूं ओ सवाल म्हारै मन नै आकळ-बाकळ कर रैयो है।
पहेली नीं, खुल’र बता वत्स।
हे गुरुदेव! नार्वे री जातरा रै दौरान आपांरै पीअेम साब सूं बठै री अेक पत्रकार हेले लिंग ‘अतिथि देवो भव:’ रो ध्यान नीं राख’र प्रेस री स्वतंत्रता नै लेय’र सवाल करियो। पीअेम साब आपरै सुभाव मुजब सवाल रो जवाब नीं देय’र आगै बधग्या। आपांरै अठै री मुख्य धारा रा न्यूज चैनलां रा पत्रकार बीं विदेशी पत्रकार सूं सवाल कर रैया है कै बा सवाल क्यूं करियो। बां रो ओ सवाल करणो जायज है कांई गुरुदेव?
बिल्कुल जायज है वत्स। अठै रा पत्रकार बां सूं सवाल करण रो साहस नीं कर’र तारीफ करै जणै दूजै देश री पत्रकार रै सवाल माथै सवाल करणो वाजबी है। बा अठै रै पत्रकारां री तौहीन करी है।
आप ई सवाल माथै सवाल करणिया री पैरोकारी कर रैया हो, इयां कियां गुरुदेव?
जिणरी खावां बाजरी बिणरी भरणी हाजरी… भारतीय ग्यान परंपरा आ सीख ई देवै। राज सूं सवाल करियां पत्रकारों सूं बां रा मालिक नाराज हुय जावै अर आपांरै मठ रो भट्ठो बैठ सकै वत्स। राज सूं सवाल नीं करणो।
चेलो सवालिया निजरां सूं गुरुजी नै देख रैयो है पण गुरुजी आंख्यां मींच्यां अबै ध्यानमगन है।
