सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में सड़कों का हाल बेहाल होता जा रहा है। सड़कों की स्थिति इतनी दयनीय है कि हर जगह गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं। मानसून के दौरान सड़क पर गड्ढों के चलते न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती है। सड़कों के खराब होने का सबसे बड़ा कारण सड़कों की गुणवत्ता है और गुणवत्ता कम से सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। देश की आर्थिक राजधानी को गड्ढामुक्त सड़कें देने के लिए सरकार और मनपा ने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन सड़कों पर बने गड्ढे उन किए गए वादों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। सड़क पर बने गड्ढों के कारण लोग अपनी जान गवां रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल मुंबई की सड़कों पर ८ प्रतिशत गड्ढों में बढ़ोतरी हुई है। साल २०२४ में जून से १७ जुलाई के बीच मुंबई में गड्ढों की ६,२३१ शिकायतें दर्ज की गर्इं, जिनमें से उस अवधि तक मनपा द्वारा सिर्फ ६,०५१ गड्ढे ही ठीक किए गए।
मनपा ने शहर को गड्ढामुक्त बनाने के लिए १७,००० करोड़ रुपए की लागत से सड़क कंक्रीटीकरण के अभियान में ४९ प्रतिशत काम पूरा तो किया, लेकिन इसके बावजूद मुंबई की सड़कों पर गड्ढे बने हुए हैं। गड्ढों की कुल संख्या और उनकी शिकायतों में भी पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ८ प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। चार महीने के मानसून के मौसम में अस्थायी रूप से स्थगित की गई मनपा के अनुसार सड़क कंक्रीटीकरण परियोजना १ अक्टूबर से फिर से शुरू होनेवाली है। मनपा सबसे पहले १५६.७४ किलोमीटर लंबी ५७४ सड़कों को पूरा करने को प्राथमिकता देगी, जो बारिश शुरू होने से पहले आंशिक रूप से पूरी हो गई थीं और सुरक्षित हो गई थीं। इनके अलावा, आगामी चरण में लगभग २०८.७० किलोमीटर लंबी ७७६ नई सड़कों का भी कंक्रीटीकरण किया जाएगा। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, १८६ किलोमीटर लंबी ७७१ सड़कें पूरी तरह से बन चुकी हैं, जबकि १५६.७४ किलोमीटर लंबी ५४७ सड़कें आंशिक रूप से पूरी होनी बाकी हैं।
