बुलाकी शर्मा राजस्थान
कैबत है कै काम री कदर हुवै, चाम री नीं। पण राज इण कैबत सूं उल्टो चालै। केंद्र अर राज्य री सरकारां आपरै अफसरां सूं लेयनै छोटै कर्मचारियां रै काम री अणदेखी करती, बां रै चाम री चमक कानी ध्यान देवै। राजकाज में साव माठो हुवै वैâ पूरमपूर समर्पित अफसर-कर्मचारी, दोनूं भांत रा मातहतां नै सरकारां इकसार मानै। उमर रै साथै चाम री चमक मंगसी पड़िया करै अर सरकारां उमर रो आंकड़ो तय कर राख्यो है। जियां ई सरकारी गुमास्तै री उमर आंकड़ै तांई पूगै, सरकारां बीं नै राजकाज में अयोग्य मानता थकां रिटायर कर देवै। कदैई रिटायरमेंट री उमर पिचपन ही, फेर अठावन हुई अर फेर साठ, बासठ कै पैंसठ।
काळू म्हाराज इण सरकारी नीति नै नीति नीं, अनीत मानै। बे गेम्स टीचर सूं रिटायर हुयोड़ा है। बोल्या, ‘राज करणियां सारू रिटायरमेंट री उमर रो आंकड़ो लागू कोनी पण राज रो काज करणिया माथै उमर रो आंकड़ो फिट कर राख्यो है। अबार ई हूं फिजीकली फिटमफिट हूं। दो सौ सूं बेसी उठक-बैठक निकाळ सकूं, पांच किलोमीटर दौड़ सकूं। पण सरकार वैकै कै अबै काम करण री उमर कोनी रैई। फेर थे सित्तर-अस्सी रा हुयोडा राज कियां कर रैया हो सरकार म्हाराज!’
म्हैं कैयो, ‘सरकार आपां नै रिटायर नीं करै जणै जवानां नै सरकारी नौकरी कियां मिलैला म्हाराज।’
बे बोल्या, ‘म्हनैं रिटायर हुयां चार साल हुयग्या अर थां नै सात। म्हारी अर थांरली औलादां डिग्रियां रो भारो माथै पर चक्यां फिरै। सरकारी नौकरियां है कठै बतावो?’
म्हारै पड़ूतर सूं पैला ई फेरूं सवाळ उछाळ्यो, ‘राज करणिया सारू ना पढ़ाई-लिखाई रो बंधन, ना डिग्रियां रो बंधन अर ना उमर रो बंधन पण राजकाज करणिया सारू बीसूं बंधन। आप म्हाराज बैंगण खावै दूजां नै परहेज बतावै, ओ कद तांई झेलसां भाईड़ा?’
बां रै सवालां री बरखा चालती रैई, ‘राजकाज सूं रिटायर हुयोड़ा चुनाव लड़ सकै, जीत्यां पछै आपांरा माननीय अेमपी, अेमअेलअे बण सकै। मंत्री बण सवैâ। राजकाज में अयोग्य मान’र रिटायर करियोड़ा आपां माथै राज करण में पाछा सुयोग्य कियां बण जावै?’
‘राज करण में ना डिग्री री जरूरत हुवै अर ना उमर आडी आवै म्हाराज, क्यूंकै बां नै राय-मशवरा देवण सारू मोटा-मोटा आईअेअेस अफसर हुवै, प्रिंसिपल सेकेट्री हुवै।’
‘फेर हाथी रा दांत खावण रा अर दीखणआळा रा न्यारा है’, काळू म्हाराज बोल्या, ‘राज रा मोटा अफसर राज री रीति-नीति बणावै अर आपांरा माननीय आपांनै आश्वासनां री चूसणी चुसावण में लाग्या रैवै, आ ही बात है नीं?’
म्हैं मून।
