संजय राऊत-कार्यकारी संपादक
गृह मंत्री अमित शाह भाजपा कार्यालय के भूमिपूजन के लिए मुंबई में आए और अभद्र टिप्पणी करके चले गए। उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में विपक्ष को पूरी तरह से खत्म कर दो,’’ लेकिन नागपुर से लेकर मुंबई तक जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। इस विरोध का आप क्या करेंगे?
महाराष्ट्र में सब कुछ ऑलवेल नहीं है, ये अब साफ हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह भाजपा कार्यालय का भूमिपूजन करने के लिए मुंबई में आए थे। सोचा था कि वे कुछ शुभ कहेंगे, लेकिन ‘‘विरोधियों का सफाया कर दो। ऐसा कर दो कि विरोधी दूरबीन से भी नजर न आएं।’’ ऐसा अभद्र बोलकर वे चले गए। अमित शाह किन विरोधियों का पूरी तरह से सफाया करने निकले हैं? भाजपा इस समय दो खंभों वाला तंबू है। दोनों खंभों को भ्रष्टाचार का दीमक लग चुका है। अगर एक खंभा ढहा, तो पूरी भाजपा ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी। भाजपा कार्यालय के लिए कुदाल चलाते समय भाजपा के सभी ‘सावजी चिकन’ यानी बाहर से आए हुए लोग मंच पर थे, लेकिन जिन्होंने महाराष्ट्र की भाजपा के लिए तकलीफें झेलीं, वो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इस महत्वपूर्ण समारोह में कहीं नजर ही नहीं आए। राणे से लेकर नॉर्वेकर तक, राम शिंदे से लेकर विखे पाटील तक, सभी बाहरी लोगों की टोली वहां मौजूद थी। ये सब कांग्रेस और शिवसेना से निकले हुए लोग थे, जिनके लिए कालीन बिछाने का काम अब असली भाजपाइयों को करना होगा। गडकरी का मंच पर न होना भाजपा का अंदरूनी विवाद है। मुंबई क्रिकेट असोसिएशन के चुनाव में भाजपा के आशीष शेलार को जगह न मिले इसलिए मुख्यमंत्री के ‘वर्षा’ से जुगाड़ लगाए जा रहे हैं। हर जगह ‘भाजपा बनाम भाजपा’ की तस्वीर है। तो फिर शाह किस दूरबीन से विपक्ष का वजूद खत्म करने वाले हैं?
ये क्या हो रहा है?
अगर शाह दूरबीन से महाराष्ट्र में हो रही घटनाओं को देखें, तो उन्हें पता चल जाएगा कि लोग भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं और पुलिस की डंडाशाही से भी नहीं डर रहे। पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री इस संदर्भ में क्या कर रहे हैं?
-मराठा समुदाय की मांगों को लेकर मनोज जरांगे पाटील हजारों लोगों के साथ मुंबई आए थे। उन्होंने आजाद मैदान में तंबू गाड़ दिया। पांच दिनों तक प्रदर्शनकारियों ने मुंबई को अस्त-व्यस्त रखा। अगर मराठी लोग मुंबई में इकट्ठा हो गए तो क्या होगा, यह जरांगे पाटील ने प्रत्यक्ष रूप से दिखा दिया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अंत तक इस विरोध का सामना करने का साहस नहीं दिखाया। अमित शाह को इस साहसिक घटना को अपनी दूरबीन से देखना चाहिए था।
-ओबीसी, धनगर और बंजारा समाज के मोर्चे और आंदोलन जगह-जगह जारी हैं।
-बच्चू कडू हजारों किसानों के साथ सड़क पर उतर आए और फडणवीस के नागपुर में घुसकर उन्होंने सबको स्तब्ध कर दिया। ‘‘किसानों का सातबारा कोरा करो, उनका कर्ज माफ करो’’, यह उनकी मांग है। मुख्यमंत्री की ओर से बावनकुले और महाजन, ये दो मंत्री कडू से लगातार चर्चा करते रहे। कडू ने जब खून-खराबे की बात कही तो भाजपा के मंत्रियों के पैरों तले की रेत खिसक गई। शाह ने यह सब दूरबीन से देखा ही होगा।
-शिवसेना ने मराठवाड़ा के बाढ़ प्रभावित किसानों का ‘हंबरडा मोर्चा’ छत्रपति संभाजीनगर में निकाला और इसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों के खातों में मदद पहुंच गई है, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस जो कह रहे हैं, वो सरासर झूठ है। मराठवाड़ा के किसान संघर्ष की तैयारी में हैं।
-सोलापुर के अक्कलकोट में शिवसेना के आनंद बुक्कानुरे किसानों की समस्याओं को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
-सिंहस्थ की पार्श्वभूमि पर, ठेकेदारों को पैसे मिलें इसलिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग को चौड़ा करने का काम अनावश्यक रूप से निकाला गया। इसके लिए सड़क के दोनों ओर मौजूद किसानों के वैध घरों और बस्तियों पर बुलडोजर चलाए गए। यह नासिक एमएमआरडीए का प्रताप है। किसानों के खेतों और घरों पर बुलडोजर चलाकर सिंहस्थ मनाना हिंदुत्व नहीं है। किसान यहां भी आंदोलन पर उतर चुका है और भूख हड़ताल पर बैठ गया है। यह विरोध भी दूरबीन से देखने लायक ही है।
-पिछले २५ दिनों से पालघर जिले के वाडा में किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों और आदिवासियों की जमीन से बिजली के टावर और लाइनें बिछाने का काम जबरन किया जा रहा है। इससे हजारों किसान प्रभावित हुए हैं और उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला है। अडानी की बिजली कंपनियों के फायदे के लिए यह सब मनमानी की जा रही है, लेकिन यहां के आदिवासी और किसान मजबूती से इस मनमानी के खिलाफ उतर आए हैं।
-चुनाव आयोग की मनमानी और भाजपा के चुनावी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुंबई में एक विशाल सर्वदलीय मोर्चा निकाला गया। यह भाजपा और आयोग की दूरबीन में समाया नहीं होगा। कई लोगों ने दूरबीन लगाकर भाजपा के चुनाव और मतदाता सूचियों में घोटाला ढूंढ निकाला और भाजपा को नंगा कर दिया। उन नंगों की सभा में देश के गृह मंत्री कहते हैं, ‘‘हम महाराष्ट्र में विरोधियों का सफाया कर देंगे।’’ उन्हें पहले पार्टी के अंदर वâे विरोधियों पर ध्यान देना चाहिए। पाकिस्तान जैसे शत्रु को अमेरिका और चीन ताकत दे रहे हैं। हैरानी की बात है कि इनकी दूरबीन वहां तक नहीं पहुंच पाती।
नेपाल से तुलना
भारतीय जनता पार्टी को लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष नहीं चाहिए। उन्हें याद रखना चाहिए कि सिर्फ विधायक, सांसद या राजनीतिक दल ही विपक्षी दल नहीं कहलाते। विभिन्न आंदोलन, मोर्चा और संघर्षों के माध्यम से रोजाना हजारों लोग सरकारी नीतियों का विरोध करने के लिए अब सड़क पर उतर आए हैं। ‘‘महाराष्ट्र नेपाल बन जाएगा’’, ऐसा जब कोई कहता है तो भाजपा और उसकी सरकार चलाने वालों को मिर्ची लग जाती है, लेकिन नेपाल में ऐसे ही आंदोलनकारियों ने एक भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका और नई सरकार को लाया गया। आज नेपाल भारत से ज्यादा शांत है। नेपाल की जनता ने शासकों की दूरबीन और बंदूकों की परवाह किए बिना विरोध किया। वे यशस्वी हो गए। दूरबीन लगाकर विपक्ष को खत्म करने की भाषा बोलनेवाले को यह ध्यान रखना चाहिए। विपक्ष को खत्म करने का मतलब है लोकतंत्र को खत्म करना। सत्ताधारियों का ये मनोरथ भारत में कभी पूरा नहीं होगा।
