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पैरोल मिलते ही भाग सकता है सलेम!..१४ दिन की अर्जी पर हाई कोर्ट में राज्य सरकार की आपत्ति

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को मुंबई हाई कोर्ट को बताया कि १९९३ के सीरियल ब्लास्ट का दोषी अबू सलेम अगर पैरोल पर रिहा होता है तो फरार हो सकता है और इससे भारत और पुर्तगाल की सरकारों के बीच गंभीर मुद्दे पैदा हो सकते हैं, जहां से उसे प्रत्यर्पित किया गया था। सरकार ने सलेम की १४ दिन की पैरोल की मांग वाली अर्जी का विरोध करते हुए एक एफिडेविट फाइल किया था, जिसमें उसके बड़े भाई की मौत और उसके बाद के रीति-रिवाजों में शामिल होने का हवाला दिया गया था। सरकार ने कहा कि उसे ज्यादा से ज्यादा दो दिन की इमरजेंसी पैरोल पुलिस एस्कॉर्ट में दी जा सकती है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने पिटीशन में रेस्पोंडेंट के तौर पर शामिल होने की मांग की, क्योंकि वह प्रॉसिक्यूटिंग एजेंसी थी। उन्होंने कहा कि अगर सलेम को बेल दी गई, तो इससे लॉ एंड ऑर्डर की प्रॉब्लम हो सकती है। जेल के इंस्पेक्टर जनरल सुहास वारके द्वारा दायर हलफनामा में कहा गया है कि सलेम एक ‘इंटरनेशनल गैंगस्टर’ था जो दशकों से क्रिमिनल एक्टिविटीज में शामिल रहा है। सलेम को पुर्तगाल और भारत के बीच एक प्रत्यर्पण संधि के तहत वहां से प्रत्यपित किया गया था। अगर सलेम को पैरोल मिल जाती है, तो वह फिर से फरार हो जाएगा, क्योंकि १९९३ में भी वह देश छोड़कर भाग गया था। अगर पिटीशनर अब फरार हो गया तो भारत और पुर्तगाल के बीच गंभीर मुद्दे पैदा होंगे और समाज के लिए भी खतरा पैदा होगा।
यूपी पुलिस ने भी दी नेगेटिव रिपोर्ट
सलेम के पैरोल मांगने के बाद, जेल अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस से रिपोर्ट मांगी। यूपी पुलिस ने एक नेगेटिव रिपोर्ट दी और कहा कि आजमगढ़ में सरायमीर, जहां सलेम जाना चाहता है, वह सांप्रदायिक रूप से सेंसिटिव इलाका है। इसलिए, जेल अधिकारियों ने उसकी १४ दिन की पैरोल एप्लीकेशन खारिज कर दी। हालांकि, एफिडेविट में कहा गया कि सलेम को दो दिन की पैरोल दी जा सकती है। बता दें कि विगत नवंबर महीने में बड़े भाई की मौत होने के बाद सलेम ने दिसंबर २०२५ में पैरोल के लिए अर्जी दी थी।

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