मुख्यपृष्ठस्तंभमानवीय वेदना और संवेदना की कहानी है ‘संवदिया’: राम प्रसाद सिन्हा

मानवीय वेदना और संवेदना की कहानी है ‘संवदिया’: राम प्रसाद सिन्हा

अनिल मिश्र / पटना

महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा रचित प्रसिद्ध कहानी ‘संवदिया’ एक विधवा नारी की पीड़ा और एक निर्धन युवा संवदिया की मानवीय संवेदनाओं की सशक्त प्रस्तुति है। उक्त बातें शिक्षाविद राम प्रसाद सिन्हा ने बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड अंतर्गत शिवनगर गांव स्थित अपने आवास पर आयोजित ‘कहानी विद कॉफी’ कार्यक्रम की 20वीं कड़ी में कहानी ‘संवदिया’ के पाठ एवं चर्चा के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि कहानी में गांव की हवेली की बड़ी बहुरिया अपने जीवन से परेशान होकर संवदिया के माध्यम से अपनी मां के पास संदेश भिजवाती है कि वह उसे वापस बुला लें, अन्यथा वह अपनी जान दे देगी। संवदिया बड़ी बहुरिया को गांव की लक्ष्मी मानता था। उसे लगा कि यदि वह गांव छोड़कर चली गई तो गांव की प्रतिष्ठा धूमिल हो जाएगी। इसी कारण वह बहुरिया की मां से मिलने के बाद भी उनका संदेश नहीं सुनाता और लौटकर बहुरिया के चरणों में गिरकर क्षमा मांगता है।
बताया गया कि बहुरिया स्वयं भी संदेश भेजने के बाद पछता रही थी। जब उसे यह पता चला कि उसका संदेश नहीं पहुंचाया गया, तो उसने राहत की सांस ली। संवदिया ने भी उसे भरोसा दिलाया कि वह बेटे की तरह उसकी सेवा करेगा। वक्ताओं ने कहा कि लेखक ने इस कहानी में नारी की वेदना, संवदिया की संवेदना तथा ग्रामीण संस्कृति का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है।
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षक पवन कुमार द्वारा कहानी पाठ से हुई। वहीं दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के शोधार्थी नचिकेता वत्स ने कहानी का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
हिमांशु शेखर ने कहा कि इस कहानी के माध्यम से विधवाओं की सामाजिक स्थिति को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है। प्रो. शिव शंकर शर्मा एवं वरिष्ठ उद्यमी सुरेश सिंह ने ऐसे कार्यक्रमों को विद्यालय स्तर तक विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों को साहित्यिक मूल्यों से जोड़ा जा सके।
वहीं वरिष्ठ शिक्षक डॉ. राजन ने कहा कि यह कहानी वेदना और संवेदना की अतिशयता की कथा है। प्लस-2 रामेश्वर उच्च विद्यालय के प्राचार्य अबरार आलम ने कहा कि यह कहानी संदेशवाहक के महत्व को उजागर करती है।
ज्ञान भारती स्कूल के राकेश मिश्रा ने अपने मगही गीत के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया। प्रो. मनोरंजन शर्मा ने कहानी की विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि रेणु की सभी कहानियां ग्रामीण संस्कृति को विस्तार देने वाली हैं।
हरेंद्र शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजनों से युवाओं का साहित्य के प्रति लगाव बढ़ता है। कार्यक्रम में कई श्रोता ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े और अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं।
कार्यक्रम का संचालन आयोजक संजय अथर्व ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बीपीएन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा ने किया। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

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