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सर्वोदय फाउंडेशन ने शिक्षा और जल संरक्षण से बदली ‘गया’ जिले के ‘लूटन बिघा’ की तस्वीर

अनिल मिश्र / पटना

बिहार के गया जिले के डोभी प्रखंड स्थित ग्राम निग्री रामबच्छनगर उर्फ ‘लूटन बिघा’ में इन दिनों सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। सामाजिक और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े इस गांव में सर्वोदय फाउंडेशन फॉर एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट ने शिक्षा और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य शुरू किया है।
ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व वाले गया जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर तथा दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद लूटन बिघा के लोग वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे थे। गांव में आजीविका के साधनों की कमी थी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी लोगों की पहुंच से दूर थी।
फाउंडेशन ने ‘ऑपरेशन ज्ञानशाला’ और ‘जलसमृद्धि’ जैसे दो प्रमुख अभियानों के माध्यम से गांव के विकास की दिशा में कार्य शुरू किया है।
बुनियादी शिक्षा से भविष्य निर्माण
फाउंडेशन द्वारा गांव के केंद्र में एक समर्पित शिक्षा केंद्र स्थापित किया जा रहा है। स्थानीय प्रशिक्षित महिला शिक्षिकाओं के माध्यम से बच्चों को बुनियादी साक्षरता और गणितीय ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। इस पहल से 120 से अधिक बच्चे, जो पहले स्कूल से दूर थे, अब नियमित शिक्षा से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा 50 से अधिक महिलाओं के लिए साक्षरता शिविर भी चलाए जा रहे हैं।
पोखरों से बढ़ा जलस्तर, खेती को मिली नई उम्मीद
सूखे की समस्या और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए फाउंडेशन ने गांव की सामुदायिक भूमि पर कई पोखरों की खुदाई और गहरीकरण कराया है। जल संरक्षण की इस पहल से बारिश का पानी अब गांव में रुकने लगा है, जिससे आसपास के कुओं का जलस्तर बढ़ा है।
एक स्थानीय किसान ने बताया कि एक ही सीजन में गांव पानी की किल्लत से निकलकर जल सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ गया है। अब पानी उपलब्ध होने से किसान एक के बजाय दो फसलें लेने लगे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।
समग्र विकास मॉडल पर कार्य
फाउंडेशन की परियोजना प्रमुख और निदेशक मंडल के अनुसार, निग्री रामबच्छनगर के लोग दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे। उनका मानना है कि केवल कॉपी-किताब या मिड-डे मील उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, यदि बच्चा प्यासे घर लौटे। इसलिए जल और शिक्षा को साथ जोड़कर आर्थिक स्थिरता और टिकाऊ विकास का मॉडल तैयार किया जा रहा है।
फाउंडेशन ने ग्रामीणों को पोखरों के रखरखाव और जल प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया है, ताकि वे स्वयं इन संसाधनों की देखभाल कर सकें।
एक नजर में प्रभाव
* 120 से अधिक बच्चों को नियमित ब्रिज कोर्स से जोड़ा गया
* 50 से अधिक महिलाओं के लिए साक्षरता शिविर आयोजित
* तीन बड़े सामुदायिक पोखरों का निर्माण और गहरीकरण
* क्षेत्र में भूजल स्तर में लगभग 8 से 10 फीट तक वृद्धि
* 200 से अधिक परिवारों के लिए दो फसल वाली खेती संभव हुई
सर्वोदय फाउंडेशन फॉर एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट ने सरकार और आम जनता से सहयोग की अपील की है, ताकि इस तरह के कार्यों का विस्तार गया जिले के अन्य पिछड़े गांवों तक भी किया जा सके।
फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो ग्रामीण और वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत है। संस्था बुनियादी शिक्षा को टिकाऊ पर्यावरणीय समाधानों से जोड़कर ऐसे सामाजिक और आर्थिक मॉडल विकसित करने का प्रयास कर रही है, जहां मानवीय गरिमा और आत्मनिर्भरता दोनों को बढ़ावा मिल सके।

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