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वाराणसी में निकला साठे का जुलूस…जंजीर और कमा से हुआ मातम

उमेश गुप्ता / वाराणसी

अजा-ए-हुसैन के आखिरी दिन की याद मनाने को सोमवार को वाराणसी की सड़कों पर अजादारों का हुजूम उमड़ा। आठ रबी-उल-अव्वल के तारीखी जुलूस में ग्यारहवें इमाम हसन असकरी का ताबूत उठा। जुलूस जब नई सड़क चौराहे पर पहुंचा तो अजादारों ने जंजीर, कमा और खंजर का मातम कर शहीदाने करबला को लहू का नजराना पेश किया।
‘…आई जेहरा की सदा, ए हुसैन अलविदा’ के नारों के साथ नौहा व मातम करता ये जुलूस शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े दालमंडी से उठाया गया। जुलूस जब नई सड़क चौराहे पर पहुंचा तो अजादारों ने जंजीर, कमा और खंजर का मातम कर शहीदाने करबला को लहू का नजराना पेश किया।
जुलूस अपनी पूरी शान के साथ जब काली महल पहुंचा तो यहां सैकड़ों की तादाद में मौजूद मर्द, ख्वातीन, बुजुर्ग, नौजवान, बच्चे और बच्चियों ने आमारी का इस्तकबाल किया। यहां मौलाना नदीम असगर रिजवी ने तकरीर में कहा कि हुसैनियत के रास्ते पर चलें।
इस मौके पर हैदर केरतपुरी, शोएब देहलवी, गुलशन बिजनौरी, शाद सिवानी ने अपने कलाम से लोगों की आंखें नम कर दीं। अंजुमन हैदरी के नौजवान नौहा व मातम करते चल रहे थे। इस जुलूस में प्रमुख रूप से असकरी राजा शाहिद कार काजिम नायाब हुसैन मुर्तुजा समझी नदीम हुसैन कमल राजा शकील अहमद जादूगर आदि शामिल थे।

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