मुख्यपृष्ठस्तंभसटायर : आवभगत जनप्रतिनिधि की

सटायर : आवभगत जनप्रतिनिधि की

-डाॅ. रवीन्द्र कुमार

एक मशहूर शेर है:
लोग हो गए हैं बेपरवाह या अब इश्क़ नहीं करते
क्यूँ अब मुहब्बत में कोई बदनाम नहीं होता
एक सूबे में ये नौबत क्यूँ कर आन पड़ी कि एक सरकारी हुक़्मनामा निकालना पड़ा कि जब भी जन-प्रतिनिधि (सोचो! नेता कहना अब गाली सा हो गया है अतः यह नया नामकरण है) आपके दफ़्तर पधारें आपको खड़े होकर इनका स्वागत करना है पूरे सम्मान के साथ। एक सीरीज़ में प्रसिद्ध संवाद था
“हमारी मम्मी को चाहिए फुल इज्ज़त ये पंडिताईन क्या होता है बे ?” अतः मॉरल ऑफ दि स्टोरी यह है कि जन-प्रतिनिधि भले कहता फिर कि वह फलां बिरादरी, फलां समाज का है और एकछत्र नेता है आपको उसे जन-प्रतिनिधि मानना है और फुल फुल इज्जत देनी है। अब सोचो! इतने पर ही बस नहीं है बल्कि उन्हीं पानी भी पिलाना है और फिर आग्रह पूर्वक उन्हें बिठाना, ठंडा गरम देना है और फिर कहीं जाकर खुद बैठना है।
अब इसमें दो बातें हैं। यह ठंडे-गरम जलपान की तफ़सील और मिल जाती तो काम आसान हो जाता। अक्सर यह देखने में आया है कि जन प्रतिनिधि के साथ जो अशिष्ट किस्म के लठैत लोग शिष्टमंडल का हिसा बन घुस आते हैं उनका सारा ध्यान समोसा, बर्फी और पकौड़ों पर होता है और उसी में उनकी अनर्जी काम पर लग जाती है। अब क्यूंकि बात पानी की ही आई है कि वह आग्रहपूर्वक पिलाना है। अतः ऐसा मालूम देता है कि बाकी जलपान वैकल्पिक है। आपकी इच्छा हो तो दें नहीं तो पानी पिला कर ही टाटा-बाय-बाय कर दें यद्यपि आपको दोनों बार खड़ा होना है ‘ एक तेरे आने से पहले एक तेरे जाने के बाद’ । उन्हें और प्रतिनिधिमंडल को लगना चाहिए कि फुल फुल इज्ज़त मिली।
मुझे यह समझ नहीं लगी कि आखिर इस जनप्रतिनिधि की परिभाषा में कौन-कौन लोग आएंगे। मसलन मंत्री, सांसद, एम.एल.ए. भर या फिर ग्राम प्रधान, सरपंच, सरपंच पति, पार्षद और नामांकित लोग बाग भी आएंगे ? रेजीडेंट सोसायटी के अध्यक्ष ? उनका ? उनका क्या? उन्हें पानी पिलाना है अथवा नहीं ? वे तो बेचारे मिलते ही पानी की समस्या को लेकर हैं। आपने गौर किया इस ऑर्डर में ज़िक्र केवल जन-प्रतिनिधियों को ‘आग्रहपूर्वक पानी पिलाने’ का है यह कतई नहीं है कि आपको उनका काम भी करना है। अतः यही पेच है। समझो अगले ने पानी तो आग्रहपूर्वक पिला दिया, बढ़िया क्वालिटी का जलपान भी करा दिया मगर काम के नाम पर ठन-ठन गोपाल, तब ? तब की कोई बात इस आदेश में नहीं है। उसके लिए इंतज़ार करें अगले आदेश का। अभी चुनाव में वक़्त है।

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