श्रीकिशोर शाही
(सत्ता और सुंदरी-१)
लंदन की उस रात ठंडी हवा में भी एक अजीब गर्मी घुली हुई थी। शहर के एक बेहद आलीशान होटल में ऊंचे दर्जे के लोगों की महफिल सजी हुई थी। बाहर से सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन भीतर कुछ ऐसा पक रहा था, जिसकी भनक किसी को नहीं थी। हंसी, संगीत और जाम के बीच अचानक कुछ चेहरे गंभीर हो उठे। एक बहुत ही खूबसूरत नैन-नक्श की युवती बड़े ही मादक अंदाज में वहां अवतरित हुई और उसके साथ ब्रिटिश सरकार के एक सांसद भी थे। दोनों, हंसते-मुस्कुराते आए और कुछ देर में वहां से अंतर्ध्यान हो गए। कुछ ही पलों में उस युवती का मुस्कुराता मादक चेहरा वहां हर किसी के मनो मस्तिष्क पर अंकित हो चुका था। हर किसी की जुबान पर बस एक ही चर्चा थी कि कौन थी वह?
कुछ देर में वहां फुसफुसाहटें शुरू हुईं और उन्हीं फुसफुसाहटों के बीच एक नाम उभरा पामेला बोर्डेस। कुछ लोग उसे बस एक खूबसूरत महिला और मॉडल के रूप में जानते थे, लेकिन उस रात उस खास पार्टी में उसकी मौजूदगी ने लोगों के कान खड़े कर दिए। कहा जा रहा था कि वह केवल इस महफिल की मेहमान नहीं, बल्कि उन लोगों के बहुत करीब है, जिनके हाथों में पैâसलों की असली ताकत होती है। पार्टी में एक मंत्री भी नजर आए थे पर वहां क्या हो रहा था, यह किसी को समझ में नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि वहां कुछ रहस्यमयी चीजें हो रही थीं, पर किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। दरवाजे बंद थे, पहरे कड़े थे, फिर भी खबर किसी तरह बाहर निकल गई कि पार्टी में सत्ता और सुंदरी का मेल देखा गया था। देर रात तक शहर के कुछ खास हलकों में यह चर्चा पैâल चुकी थी कि एक ऐसी महिला, जिसे अभी तक कोई खास नहीं जानता था, सत्ता के सबसे भीतरी दायरे तक पहुंच चुकी है। सवाल सिर्फ उसके रिश्तों का नहीं था, बल्कि उन रास्तों का था, जिनसे होकर वह यहां तक आई थी। यह वो पार्टी थी, जहां से पामेला नाम की इस सुंदरी की ‘कुंडली’ खुलनेवाली थी।
एक कोने में बैठे दो लोग धीमी आवाज में बात कर रहे थे, ‘यह मामला अगर बाहर गया तो बहुत कुछ बदल सकता है।’ दूसरे ने बस इतना कहा, ‘अब बात छिपेगी नहीं।’ और सच में, वही रात थी जब एक कहानी ने जन्म लिया, जो आने वाले दिनों में अखबारों की सुर्खियां बनने वाली थी।
(शेष अगले अंक में)
