-राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण
-गणनाकर्मियों से जुड़े बैंक और सुरक्षाकर्मी भी रडार पर, आय-संपत्ति का ब्योरा खंगाल रही पुलिस
-एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने मुखर होकर कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ना होगा, अगर ३ दिन के अंदर नहीं छोड़ते हैं तो पूरी अयोध्या को जाम कर दिया जाएगा, किसी को अयोध्या में आने नहीं दिया जाएगा।
अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चढ़ावे की गणना करने वाले कर्मचारियों और आरोपियों की संपत्तियों की पड़ताल के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उनसे जुड़े बैंककर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और गणनाप्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों पर भी है। पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम उनकी आय, घोषित संपत्ति तथा संभावित अघोषित संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित बैंक कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कर्मियों से उनकी आय एवं संपत्ति का विवरण मांगा गया है। कई लोगों ने अपना ब्योरा जांच टीम को सौंप भी दिया है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चढ़ावे की गणना, निगरानी अथवा बैंक में धनराशि जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े किसी व्यक्ति की संपत्ति में असामान्य वृद्धि तो नहीं हुई। इस बीच, जांच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियां ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी से भी पूछताछ की तैयारी कर रही हैं। उनसे चढ़ावे के वित्तीय प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से संबंधित सवाल किए जा सकते हैं।
जांच का एक महत्वपूर्ण आधार ट्रस्ट और बैंक के बीच चढ़ावे की गणना, उसे जमा करने तथा धन के प्रबंधन को लेकर हुआ समझौता पत्र भी है। बताया जा रहा है कि इस एमओयू पर कोषाध्यक्ष के भी हस्ताक्षर हैं। जांच टीम यह जानना चाहती है कि समझौते में निर्धारित नियमों और जिम्मेदारियों का पालन किस सीमा तक किया गया तथा निगरानी व्यवस्था में चूक होने पर उसकी जानकारी जिम्मेदार पदाधिकारियों को क्यों नहीं मिली। उधर, ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक अब ११ जुलाई के बजाय ६ जुलाई को अयोध्या में बुलाई गई है। बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफों पर निर्णय के साथ ट्रस्ट की वित्तीय तथा प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे दिए जाने की पुष्टि पहले ही हो चुकी है।
संपत्तियों से लेकर शीर्ष जिम्मेदारों तक जांच का दायरा बढ़ा
राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी अब आरोपियों की आय, बैंक खातों, संपत्तियों और परिजनों के वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। पहले की कार्रवाई में करीब ७९.८५ लाख रुपए बरामद हुए थे, जबकि कथित गड़बड़ी की राशि ७ से ७.५ करोड़ रुपए के बीच बताई जा रही है। जांच में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं, कमीशन और कुछ लोगों की संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी के आरोप भी खंगाले जा रहे हैं। एसआईटी को जांच पूरी करने के लिए १५ दिन का अतिरिक्त समय मिला है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच निचले कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या शीर्ष जिम्मेदारों की भूमिका भी तय होगी।
सिफारिशी नियुक्तियों से करोड़ों के लेन-देन
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित करोड़ों रुपए की चोरी की जांच अब तेजी से पैâलती जा रही है। पुलिस और एसआईटी केवल गिरफ्तार कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सिफारिशी नियुक्तियों, दान गणना व्यवस्था, बैंककर्मियों की भूमिका और आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच कर रही हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूर्व ट्रस्टी की सिफारिश पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। पूछताछ में कथित तौर पर दान राशि निकालने के लिए सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाने और रकम को पहले शौचालय में छिपाकर बाद में बाहर ले जाने जैसी बातें सामने आई हैं। इन दावों की जांच जारी है। पुलिस ने अदालत की अनुमति के बाद जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ की। जांच सूत्रों का दावा है कि आरोपियों ने दान राशि चुराने की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। कथित रूप से गणना कक्ष की चाबी एक प्रमुख आरोपी के पास रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक से जुड़े कर्मचारियों के पास होती थी। एक व्यक्ति वैâमरों से बचकर रकम निकालता और अन्य आरोपी उसके चारों ओर खड़े होकर दृश्य ढक देते थे।
