मुख्यपृष्ठसमाचारखोखले हैं सुरक्षा के दावे!

खोखले हैं सुरक्षा के दावे!

मयंक हत्याकांड के बाद भी नहीं चेता सिस्टम!

बोरीवली स्टेशन पर शो पीस बने स्कैनर

जेदवी / मुंबई

मुंबई लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में २२ वर्षीय मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या की घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे किए थे। हालांकि, घटना के एक सप्ताह बाद बोरीवली रेलवे स्टेशन की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आई। ‘दोपहर का सामना’ की ग्राउंड रिपोर्ट में स्टेशन के प्रवेश द्वार और प्लेटफॉर्म नंबर-१० पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैगेज स्वैâनिंग मशीन बंद मिली, जबकि वहां कोई सुरक्षा कर्मी भी तैनात नहीं था।
मुंबई के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल बोरीवली स्टेशन से प्रतिदिन करीब ३.६५ लाख यात्री सफर करते हैं। यहां लगभग १,२०० उपनगरीय लोकल ट्रेनों के अलावा १९१ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें भी संचालित होती हैं। इतनी बड़ी यात्री संख्या के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था बेहद लचर दिखाई दी।
मौके पर जांच के दौरान पाया गया कि प्लेटफॉर्म नंबर-१० पर लगी बैग स्वैâनिंग मशीन लंबे समय से बंद पड़ी है। स्वैâनर के पास रखी सुरक्षा कर्मी की कुर्सी खाली थी और किसी भी यात्री के सामान की नियमित जांच नहीं हो रही थी। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि मशीन लंबे समय से बंद है और इसे शुरू करने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। स्टेशन पर मौजूद हेल्प डेस्क के पुलिसकर्मियों ने भी स्वीकार किया कि भारी भीड़ के कारण हर यात्री और हर बैग की जांच करना संभव नहीं है। केवल संदिग्ध प्रतीत होने वाले लोगों की ही तलाशी ली जाती है। वहीं, बोरीवली स्टेशन मास्टर ने दावा किया कि आरपीएफ और जीआरपी द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है तथा फुटओवर ब्रिज और प्लेटफॉर्म पर सामान की जांच की जाती है। लेकिन ‘दोपहर का सामना’ की पड़ताल में ये दावे जमीनी स्तर पर सही साबित नहीं हुए। सुरक्षा संबंधी अन्य सवालों पर स्टेशन मास्टर ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए जीआरपी से संपर्क करने की सलाह दी। उल्लेखनीय है कि जून २०२६ में चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल में मामूली विवाद के दौरान मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले २४ जनवरी २०२६ को मलाड रेलवे स्टेशन पर कॉलेज प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की भी चाकू मारकर हत्या हुई थी।
दावे बड़े, सुरक्षा गायब
मयंक लोहार हत्याकांड के बाद सुरक्षा बढ़ाने के दावों के बावजूद बोरीवली स्टेशन पर बैगेज स्वैâनर बंद मिला और जांच के लिए कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था। रोजाना ३.६५ लाख यात्रियों वाले स्टेशन की यह स्थिति रेलवे की सुरक्षा तैयारियों और दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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