सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा चुनावों से पहले राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोस्ती की आड़ में सत्ता का असली युद्ध शुरू हो चुका है, जिसमें हर दल अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहा है। दूसरी ओर अजीत पवार का गुट यानी ‘दादा गुट’ पूरी तरह शांत बैठा है, जैसे तमाशा देख रहा हो। इस सियासी खींचतान ने संकेत दे दिए हैं कि नासिक महानगरपालिका का मैदान अब ‘महासंग्राम’ बनने वाला है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में निकाय चुनाव किसी भी समय घोषित हो सकते हैं और इसी के चलते सभी राजनीतिक दलों ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। नासिक में सत्ता पक्ष महायुति ने चुनावी मोर्चा संभाल लिया है। महायुति में भाजपा बड़ा भाई है, जबकि शिंदे गुट आक्रामक सहयोगी के रूप में सक्रिय है। आलम यह है कि ठाणे, मुंबई और नई मुंबई मनपा की तरह ही नासिक में भी भाजपा और शिंदे गुट के बीच सीट बंटवारे को लेकर असंतोष और खींचतान शुरू हो गई है। यहां अजीत पवार गुट भाजपा जो देगी, वही स्वीकार करने के मूड में है। इस गुट की संगठनात्मक और राजनीतिक तैयारी बहुत आक्रामक नहीं है इसलिए भाजपा ने जैसे उन्हें अधीन मान लिया है। भाजपा ने नासिक मनपा चुनाव के लिए हंड्रेड प्लस यानी १०० से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य घोषित किया है। पिछली बार भाजपा के पास ६५ नगरसेवक थे। बीते कुछ महीनों में भाजपा ने विपक्ष के कई प्रभावशाली और पूर्व नगरसेवकों को अपने दल में शामिल किया है। इन्हीं गतिविधियों के चलते शिंदे गुट सतर्क हो गया है। गुट ने शुरुआती चरण में ही ३२ पूर्व नगरसेवकों को शामिल कर लिया है। कई लोगों ने टिकट की उम्मीद में पार्टी का रुख किया है। लेकिन यदि भाजपा ने सीट बंटवारे में बाधा डाली तो शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
… तो अकेले दम पर लड़ेगा घाती गुट
इस संदर्भ में शिंदे गुट के संपर्क प्रमुख अजय बोरस्ते ने भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ी तो वह स्वबल पर चुनाव लड़ेंगे। शहर के सभी प्रभागों में संगठनात्मक ढांचा सक्रिय कर दिया गया है और फिलहाल बूथ स्तर पर गुट की मशीनरी को मजबूत करने पर फोकस है। ऐसे में महायुति में सीट बंटवारे को लेकर टकराव लगभग तय माना जा रहा है। गठबंधन के हर घटक दल ने मनपा पर अपने दम पर सत्ता हासिल करने का संकल्प लिया है। इसी आक्रामक रुख के कारण शिंदे गुट ने भी सतर्क चालें चलनी शुरू की हैं।
इन्हें टिकट नहीं मिलने का है डर
सूत्रों के मुताबिक, यदि महायुति बनी तो कुछ महत्वाकांक्षी नेताओं को टिकट न मिलने का डर है। इसलिए स्वबल की तैयारी शुरू कर दी गई है। नासिक मनपा को लेकर जो भी निर्णय उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे लेंगे, उसी पर आगे की कार्रवाई होगी। साथ ही शिंदे गुट पहले से ही सावधानी बरत रहा है।
