-आंदोलन का हमारा नहीं है कोई विरोध
– दादा और शिंदे गुट ने बोला विपक्ष की भाषा
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई में ‘सत्य का महामोर्चा’ के उफान के बीच महायुति के भीतर भूचाल मच गया है। मतदाता सूची में धांधली और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन का असर अब भाजपा के अपने खेमे तक जा पहुंचा। शिंदे गुट और अजीत पवार गुट के मंत्रियों ने इस आंदोलन का खुलकर विरोध करने से इनकार कर दिया। दोनों ही नेताओं ने साफ कहा कि अगर फर्जी मतदाता सूची में गड़बड़ी है तो उसे दुरुस्त किया जाना चाहिए। इस आंदोलन का हमारा कोई विरोध नहीं है। शिंदे और दादा गुट के ये सुर सीधे विपक्ष की भाषा बोलते नजर आए, जिससे महायुति में बगावत की आहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मतदाता सूची पर उठे सवालों ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि अब उसके साथी ही सत्य का महामोर्चा की धुन पर कदम मिलाते दिख रहे हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को बड़ा मोड़ देखने को मिला। मुंबई में मतदाता सूची में धांधली और वोट चोरी के खिलाफ महाविकास आघाड़ी में शामिल शिवसेना, राकांपा, मनसे और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित सत्य का महामोर्चा जहां विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन करता दिखा, वहीं भाजपा के सहयोगी दलों शिंदे गुट और अजीत पवार गुट के मंत्रियों ने चौंकानेवाला रुख अपनाया है। दोनों गुटों के नेताओं ने खुलकर कहा है कि उन्हें इस मोर्चे से कोई विरोध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी मतदाता सूची की गड़बड़ियों को दूर किया जाना चाहिए। इस बयानबाजी से महायुति सरकार में दरार की चर्चा तेज हो गई है।
मोर्चे का विरोध नहीं
शिंदे गुट के मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि चुनावों के दौरान कई मुद्दे सामने आते हैं। अब फर्जी मतदाता सूची की बात सामने आई है, जिसमें एक ही नाम कई बार दर्ज पाया गया है। इस मोर्चे का निर्णय चुनाव आयोग को करना चाहिए। हमारा इस आंदोलन से कोई विरोध नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यह समस्या केवल एक निर्वाचन क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में पैâली है।
सूचियों में त्रुटियां दूर करना जरूरी
अजीत पवार गुट के वरिष्ठ मंत्री हसन मुश्रीफ ने भी हैरान करनेवाला बयान दिया। अगर आज का यह मोर्चा मतदाता सूचियों में त्रुटियां दूर करने के लिए है तो हमें कोई आपत्ति नहीं। हम भी मानते हैं कि त्रुटिपूर्ण सूचियों पर चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए। उन्हें दुरुस्त करना बेहद जरूरी है।
मुश्किल में फंसी भाजपा
दोनों सहयोगी दलों के इस रुख से भाजपा के भीतर हलचल मच गई है। एक तरफ विपक्ष सत्य का महामोर्चा निकालकर सरकार को घेरने में जुटा है तो दूसरी तरफ शिंदे और अजीत पवार गुट के मंत्रियों के सुर बदलने से भाजपा के लिए संकट गहरा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महायुति के भीतर यह मतभेद आगे चलकर बड़ा राजनीतिक भूचाल ला सकता है, क्योंकि अब भाजपा के अपने साथी ही वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष के सुर में सुर मिलाते दिख रहे हैं।
