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महायुति की राजनीति में भूचाल के संकेत; शिंदे को सदमा… निकाय चुनाव से पहले गठबंधन का टूटना तय!

-विदर्भ-मराठवाड़ा में भाजपा की अकेले उतरने की तैयारी

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

महाराष्ट्र में जल्द ही स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा होने की उम्मीद है। उससे पहले ही राजनीति में भूचाल के साफ संकेत दिखाई देने लगे हैं। बताया जा रहा है कि निकाय चुनाव से पहले महायुति टूट की राह पर पहुंच गई है। इसी से महायुति में शामिल घटक दल जो कल के साथी थे, अब वे ही विरोधी बनते नजर आ रहे हैं। इसी के साथ ही महायुति में कई जगहों पर आमने-सामने टक्कर तय हो चुकी है। दूसरी तरफ विदर्भ और मराठवाड़ा में भाजपा अकेले मैदान में उतरने की तैयारी में जुटी है, जबकि अन्य गुट भी स्वबल पर चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं। ऐसे में निकाय चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ी हलचल होना तय माना जा रहा है।
सभी दलों ने तेज की मोर्चाबंदी
महाराष्ट्र में मनपा, नगर परिषद, जिला परिषद और पंचायतों का चुनाव जल्द होनेवाला है। इन चुनावों को लेकर सभी दलों ने मोर्चाबंदी तेज कर दी है। परंपरागत गठबंधनों के बिखराव और नए समीकरणों की आहट से यह साफ हो गया है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणी ही नहीं बहुकोणी होगा।
दादा गुट बीजेपी को दे रहा दम!..कई जगह आमने-सामने की टक्कर तय
राज्य में जहां-जहां गठबंधन टूटेंगे, वहां स्थानीय स्तर पर सत्ताधारी दलों की मुश्किलें बढ़ेंगी और विपक्षी दलों को नई जमीन तलाशने का मौका मिलेगा। इन अटकलों के बीच यह साफ दिखाई देने लगा है कि महायुति में शामिल गुट लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह निकाय चुनावों में सभी दल एकजुट नहीं रहेंगे। महायुति नेताओं के बयानों से यह साफ हो गया है कि जहां जरूरत होगी वहीं युति नजर आएगी, लेकिन ज्यादातर जगहों पर कल के साथी आज विरोधी बनकर सामने होंगे। अजीत पवार गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल ने साफ कहा है कि उनका दल चुनाव अपने दम पर लड़ेगा और इस बाबत उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि मुंबई मनपा में महायुति एक साथ नजर आएगी, लेकिन ठाणे में साथ दिखने की संभावना नहीं है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड में अजीत पवार गुट स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने पर जोर दे रहा है। छत्रपति संभाजीनगर और नासिक में भी महायुति के साथ लड़ने की संभावना कम है। विदर्भ और मराठवाड़ा में भाजपा को भी अपने दम पर लड़ने की बेचैनी हो रही है।
विपक्षी दलों को सीधे फायदा
महायुति का राजनीतिक प्रदर्शन इस बार पूरी तरह सवालों के घेरे में है। गठबंधन टूट के कगार पर खड़ा नजर आ रहा है और कई पुराने सहयोगी अब विरोधी बन चुके हैं। ठाणे, पुणे, नासिक और संभाजीनगर में महायुति के घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरेंगे, जिससे महायुति की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। मुंबई जैसी बड़ी जगहों में एकजुट दिखने के बावजूद अधिकांश जिलों में महायुति का प्रभाव कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में विपक्षी दलों को इसका सीधा फायदा मिलनेवाला है।

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