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गजबे है : एजुकेशन के नाम पर एक्सटॉर्शन! …शिक्षा के मंदिर में खुलेआम कमीशनखोरी

उमा सिंह

उत्तर प्रदेश, जिसे अक्सर ‘उत्तम प्रदेश’ और ‘सुशासन’ के मॉडल के तौर पर पेश किया जाता है, वहीं से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो इन दावों पर सीधे सवाल खड़े करती है। यहां स्कूलों में अब सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि ‘कॉपियों का कॉम्बो ऑफर’ भी मानो अनिवार्य हिस्सा बनता जा रहा है।
कागजों पर पारदर्शिता के पाठ पढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में अभिभावकों को ‘चुप रहो, वरना नाम कट जाएगा’ जैसी धमकियां भी ऑन वैâमरा दी जाती हैं। `जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह टॉलरेंस किसके लिए है, व्यवस्था के लिए या अव्यवस्था के लिए?
दरअसल, हरदोई के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल की प्रिंसिपल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि वीडियो में वे एक अभिभावक से न सिर्फ बदसलूकी करती नजर आती हैं, बल्कि उन्हें कथित तौर पर धमकाती भी हैं। मामला शहर के एसपी तिराहा स्थित एक स्कूल का बताया जा रहा है, जहां यूकेजी में पढ़ने वाले छात्र की मां, नीलम वर्मा, स्कूल की मनमानी के खिलाफ खड़ी हुईं। उन्होंने स्कूल द्वारा तय डीलर से किताबें तो खरीद ली थीं, लेकिन विवाद तब बढ़ गया जब कॉपियां भी केवल स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया गया। जब अभिभावक ने इस पर आपत्ति जताई और प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की, तो मामला सुलझने के बजाय और बिगड़ गया। वायरल वीडियो में प्रिंसिपल कथित तौर पर अभिभावक को चुप रहने की चेतावनी देती सुनाई देती हैं। यहां तक कि बच्चे का नाम काटने की बात भी कही जाती है। यह घटना निजी स्कूलों में पनप रहे बुक और ड्रेस सिंडिकेट की ओर इशारा करती है। अक्सर अभिभावकों को एक तय दुकान से महंगा सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे कथित तौर पर कमीशन का खेल चलता है। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों में आक्रोश है और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा?
उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच हरदोई की यह घटना सरकार की सख्त छवि की भी परीक्षा ले रही है। अगर शिक्षा के मंदिर में ही अभिभावकों को डर और दबाव का सामना करना पड़े, तो जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?

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