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सायन-कोलीवाड़ा का एसआरए प्रोजेक्ट… फ्लैटों के आवंटन में घोटाला!.. हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

सामना संवाददाता / मुंबई

सायन-कोलीवाड़ा क्षेत्र में झोपड़पट्टी पुनर्वास योजना के तहत बनाए गए फ्लैटों के आवंटन मामले में हुए तथाकथित घोटाले की जांच करने का आदेश मुंबई हाई कोर्ट ने दिया है।
हाई कोर्ट ने इस मामले में झुग्गी बस्ती पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) द्वारा गुमशुदा व्यक्तियों को अवैध रूप से फ्लैट आवंटित करने के आरोप को संज्ञान में लेते हुए उक्त आदेश दिए। इसके साथ ही न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने इस स्थिति को बेहद चौंकाने वाला बताते हुए प्राधिकरण को इस मामले में अनियमितताओं की जांच करने और डेवलपर की भूमिका निर्धारित करने का भी आदेश दिया। अदालत ने फ्लैटों के कथित अवैध आवंटन के संबंध में क्या कार्रवाई की गई है, यह भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि सायन-कोलीवाड़ा स्थित निर्मल नगर सहकारी आवास समिति की दस साल पुरानी झोपड़पट्टी पुनर्वास परियोजना से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फ्लैटों के आवंटन में बरती गई अनियमितताओं पर आश्चर्य व्यक्त किया और उपरोक्त आदेश पारित किया। बताया जाता है कि सोसायटी ने ५ मई २०१४ को पुनर्वास परियोजना के लिए एक डेवलपर नियुक्त किया था। उसके बाद १,३४० पात्र झुग्गीवासियों के नामों की घोषणा की गई। बाद में इस योजना का कार्यान्वयन दिसंबर २०२४ में शुरू हुआ। पात्र उम्मीदवारों में से ८०४ सदस्यों को कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से फ्लैट आवंटित किए गए थे, लेकिन सायन-कोलीवाड़ा में नारियल बेचने का व्यवसाय करने वाले याचिकाकर्ता मणिकम पलानीवेल देवेंद्र के दावे के अनुसार, उसका नाम पात्र झुग्गीवासियों की सूची में था। साथ ही उसके दोस्त मुरुगन देवेंद्र, जो उसी इलाके में एक साइबर वैâफे चलाते हैं, उनका नाम भी सूची में शामिल था। याचिकाकर्ता का दावा था कि पात्र होने के बावजूद हमें लॉटरी में फ्लैटों से वंचित कर दिया गया। जबकि लापता व्यक्तियों को अवैध रूप से फ्लैट आवंटित किए गए। इस याचिका को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने उक्त आदेश जारी किए।

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