मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिआध्यात्मिक गुरु डॉ. राजेंद्र महाराज हुए ब्रह्मलीन

आध्यात्मिक गुरु डॉ. राजेंद्र महाराज हुए ब्रह्मलीन

सामना संवाददाता / मालाड
मुंबई में निवासरत संत शिरोमणि आध्यात्मिक गुरु डॉ. राजेंद्र महाराज रविवार, ७ सितंबर को प्रात: ब्रह्मलीन होकर परमधाम को प्रस्थान कर गए। उनका जीवन धर्म, अध्यात्म और करुणा का अनुपम उदाहरण रहा। वे पिछले पचास वर्ष से अमृत वाणी कर जनमानस का कल्याण कर रहे थे। उन्होंने मालाड (पश्चिम) में ऑरलम स्थित अमोघ धाम की स्थापना सन २००१ में की थी, जहां प्रत्येक रविवार को सत्संग किया जाता है।

गुरु राजेंद्र महाराज के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए पीयूष गोयल, गोपाल शेट्टी, विद्या ठाकुर, विनोद शेलार, असलम शेख तथा कई व्यवसायी और समाजसेवक पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सोमवार, ८ सितंबर को प्रात: ९ बजे उनके निवास ‘गुरु महिमा’, साई बाबा पार्क, मालाड (पश्चिम) से हिंदू श्मशान भूमि, मालाड (पश्चिम) तक शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों भक्त और अनुयायी सम्मिलित रहे।

‘अमृतवाणी सत्संग’ कार्यक्रम द्वारा उनका मार्गदर्शन देश और विदेश तक पहुंचता रहा है। अपने मंत्र ‘हैव फेथ इन योर फेथ’ के माध्यम से उन्होंने पूरे संसार को संदेश दिया है। साथ ही ‘व्हाइट फ्लावर’ और ‘बिखरें अनमोल होकर’ ग्रंथ का लेखन किया है। उन्हें सन २०१९ में राजस्थान के जगदीश झाबरमल टिबड़ेवाल यूनिवर्सिटी, झुंझुनूं द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने अपने राजनीतिक कार्यकाल के दौरान राजभवन में गुरु राजेंद्र महाराज को भारत गौरव सम्मान प्रदान किया था।

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