मुख्यपृष्ठनए समाचारसोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर बीएचयू में आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर बीएचयू में आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन

उमेश गुप्ता / वाराणसी

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026” के अंतर्गत मंगलवार को स्वतंत्रता भवन में “आध्यात्मिक संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। यह आयोजन संयुक्त रूप से संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया। भक्ति, श्रद्धा एवं संस्कृति पर केंद्रित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न भागों से संत, आचार्य सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के कुलपति एवं शिक्षाविदों ने सहभागिता की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय आत्मगौरव का प्रतीक है। सोमनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भारतीय आस्था, श्रद्धा एवं सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर इस बात का प्रतीक है कि किसी राष्ट्र की आत्मा को कभी पराजित नहीं किया जा सकता।
प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज, विश्वविद्यालय अथवा राष्ट्र के विकास के लिए आत्मविश्वास और स्वाभिमान अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रिकोणमिति, ज्योतिष, गणित, संगीत एवं धर्मशास्त्र सहित अनेक क्षेत्रों में भारत ने विश्व को महत्वपूर्ण ज्ञान दिया है। आवश्यकता इस बात की है कि इन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि भारतीय चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके।
कार्यक्रम के अध्यक्ष स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा, हरिद्वार ने अपने संबोधन में कहा कि आज विश्वभर में आयुर्वेदिक औषधियों, योग और भारतीय संस्कारों के प्रति गहरा उत्साह दिखाई दे रहा है, क्योंकि भारतीय संस्कृति केवल भौतिक संपदा प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य को उससे ऊपर उठकर आध्यात्मिक चेतना की ओर अग्रसर होने का मार्ग भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी सनातन संस्कृति का उपासक है, जो नित्य, शाश्वत और अमिट है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों का पुनर्जागरण विश्वविद्यालयों के माध्यम से ही संभव होगा, क्योंकि शिक्षण संस्थान नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान और जीवन मूल्यों से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी महाराज, अयोध्या ने अपने संबोधन में युवा शक्ति के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि युवाओं में ऐसी अपार ऊर्जा और क्षमता निहित है, जो विश्व स्तर पर बड़े परिवर्तन लाने में सक्षम है।
प्रो. श्रीनिवास वरखेडी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास हजारों वर्षों पुराना एवं अत्यंत समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान पर्व के अवसर पर हमें अपने गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने के साथ-साथ अपने नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक आदर्शों और मानवीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।
आयोजन के समन्वयक प्रो. ब्रजभूषण ओझा, मानित व्यवस्थापक, श्री विश्वनाथ मंदिर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा सह-समन्वयक प्रो. विनय कुमार पाण्डेय, समन्वयक, वैदिक विज्ञान केंद्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय रहे।
कार्यक्रम में प्रो. रंजन कुमार सिंह, छात्र अधिष्ठाता, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा प्रो. सुषमा घिल्डियाल, संकाय प्रमुख, कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त अनेक विद्यालयों एवं गुरुकुलों से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

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