-भुजबल के खिलाफ भाजपा ने उतारे तीन ओबीसी मंत्री
-हताश हुए भुजबल, नाराज होकर बैठक छोड़ी
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में इन दिनों आरक्षण को लेकर सड़क पर चल रही लड़ाई अब मंत्रालय में पहुंच गई है। आरक्षण को लेकर अब मंत्रियों के बीच भिड़ंत हो गई है। महायुति सरकार में अजीत पवार गुट और भाजपा आमने-सामने हो गई है। ओबीसी के मुद्दे पर भाजपा पर भारी पड़ रहे अजीत पवार गुट के मंत्री छगन भुजबल को घेरने के लिए भाजपा ने अपने तीन मंत्री मैदान में उतारे हैं।
बताया जाता है कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के साथ मंत्री पंकजा मुंडे और अतुल सावे को भाजपा ने डैमेज कंट्रोल के लिए खड़ा किया है। ये लोग भुजबल पर सीधे तौर पर अटैक करने को तैयार हैं। आरक्षण से संबंधित समिति की बैठक में भी भुजबल की मांग को दरकिनार कर उन्हें बिना सबूत के बात करने से रोक दिया गया। जिसके बाद अपनी ही सरकार में अपनी मांग को लेकर हताश नजर आ रहे भुजबल इस बैठक को बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। भुजबल की नाराजगी इतनी थी कि बाहर उन्होंने किसी से बात नहीं की, सिर झुकाए सीधे चले गए। इससे माना जा रहा है कि राज्य में महायुति के बीच अब आरक्षण को लेकर कलह तेज हो गई है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में मंत्रालय में ओबीसी मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मंत्री छगन भुजबल, पंकजा मुंडे सहित कई ओबीसी नेता उपस्थित थे। इस दौरान छगन भुजबल ने मराठा आरक्षण से जुड़े कुणबी रिकॉर्ड के संबंध में जारी किए गए जीआर में कुछ शब्दों पर आपत्ति जताई। सूत्रों की मानें तो ओबीसी उप समिति की पहली बैठक तूफानी रही। हैदराबाद गजट लागू करने के जीआर जारी करने के मामले में मंत्री छगन भुजबल के आक्रामक रुख को देखा गया।
जीआर को लेकर भुजबल ने क्या कहा
-ओबीसी को नुकसान- छगन भुजबल ने कुणबी रिकॉर्ड के संबंध में जारी किए गए जीआर से ओबीसी को नुकसान होने की बात कही और भुजबल ने अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के अधिकारियों को भी निशाने पर लिया। फंड नहीं मिलने का आरोप लगाया।
-सीधे अदालत जाएंगे- मंत्री छगन भुजबल ने यह इशारा दिया कि जीआर जारी होने से अब हम सभी असहाय हैं और अगर यहां से मामला हल नहीं हुआ तो हम सीधे अदालत जाएंगे और पैâसला लेंगे।
-बावनकुले ने नहीं मनाया- उप-समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यदि छगन भुजबल राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए जीआर के खिलाफ अदालत जाते हैं, तो यह उनका निर्णय होगा।
-श्वेत पत्र जारी किए जाएं- पंकजा मुंडे ने कहा कि मराठा आरक्षण के संबंध में अवैध दावे नहीं किए जाने चाहिए और उन्होंने एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
