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संघर्ष ने मुझे एक अच्छा इंसान व कलाकार बनने में मदद की- आयुष शर्मा

-लवयात्री, अंतिम और रूसलान जैसी फिल्मों के नायक रहे आयुष शर्मा अपनी आगामी फिल्म ‘काशी’ को लेकर जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाले हैं। इन दिनों बनारस में चल रही इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सामना के लिए “हिमांशु राज” ने उनसे खास बातचीत की:-

प्रश्न: आप एक मजबूत राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन वाले परिवार से आते हैं। आपके दादा पंडित सुखराम बड़े नेता रहे और पिता अनिल शर्मा विधायक हैं। इस पृष्ठभूमि का आपके जीवन पर कितना असर पड़ा?
उत्तर: मेरा परिवार हमेशा चर्चाओं में रहा है, लेकिन मैंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। घर से संस्कार मिले, अनुशासन मिला और लोगों के बीच रहने की समझ भी मिली। लेकिन जब मैंने अभिनय की राह चुनी, तो मुझे यह समझना पड़ा कि मेरी पहचान मुझे खुद बनानी होगी।

प्रश्न: आपने एक बार बताया था कि जब आपने पिता से एक्टिंग में करियर बनाने की बात कही थी, तो उन्होंने आपको हतोत्साहित किया था। उस समय यह कितना कठिन था?
उत्तर: वह मेरे लिए आसान पल नहीं था। पिता ने बहुत साफ शब्दों में कहा था कि मैं हीरो जैसा नहीं दिखता और वह मुझे स्क्रीन पर देखने के लिए पैसे भी खर्च नहीं करेंगे। उस वक्त बुरा तो लगा, लेकिन शायद उसी ने मुझे भीतर से और मजबूत बनाया। मैंने ठान लिया कि मुझे अपनी मेहनत से जगह बनानी है।

प्रश्न: आपने खुद को लॉन्च करने के लिए पिता से 10 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। क्या वह फैसला आपके लिए मोड़ साबित हुआ?
उत्तर: बिल्कुल। जब वहां से मदद नहीं मिली, तो मुझे समझ आ गया कि रास्ता आसान नहीं होगा। पिता ने मुंबई में आर्थिक सहारा भी बंद कर दिया था, लेकिन शायद उसी मुश्किल ने मुझे जमीन पर रखा। मैंने सीखा कि सपनों तक पहुंचने के लिए केवल इच्छा नहीं, धैर्य और मेहनत भी चाहिए।

प्रश्न: बाद में आपने सिनेमा की दुनिया में अपनी जगह बनाई। इस सफर को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: यह सफर संघर्ष से भरा रहा, लेकिन यही इसकी खूबसूरती भी है। हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ा। मैं चाहता था कि लोग मुझे मेरे काम से पहचानें, न कि सिर्फ मेरे परिवार के नाम से। आज जब पीछे देखता हूं, तो लगता है कि संघर्ष ने मुझे बेहतर इंसान और बेहतर कलाकार बनाया।

प्रश्न: अर्पिता खान से आपकी शादी भी खूब चर्चा में रही। इस रिश्ते की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर: हमारी मुलाकात और बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ी। शुरुआत में अर्पिता और उनके परिवार को मेरे बैकग्राउंड के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। लेकिन जब एक रिश्ता विश्वास और समझ पर टिका होता है, तब नाम या पृष्ठभूमि उतनी बड़ी नहीं रह जाती। हमें एक-दूसरे को समझने का समय मिला और फिर हमने शादी का फैसला किया।

प्रश्न: आपने अर्पिता को अपने बच्चों की बेहतरीन मां बताया है। उनके बारे में क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर: अर्पिता बहुत मजबूत और संवेदनशील इंसान हैं। वह हमारे परिवार की धुरी हैं। एक मां के तौर पर वह बेहद समर्पित हैं और बच्चों को जिस तरह संभालती हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे ऐसा जीवनसाथी मिला।

प्रश्न: इन दिनों आप फिल्म ‘काशी’ की शूटिंग के लिए वाराणसी में हैं। यह फिल्म आपके लिए क्या मायने रखती है?
उत्तर: ‘काशी’ मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक प्रोजेक्ट है। बनारस की गलियां, घाट, संस्कृति और आस्था—यह सब इस फिल्म की आत्मा हैं। यहां शूटिंग करते हुए लगता है कि कहानी को उसके असली माहौल में जी रहा हूं।

प्रश्न: ‘काशी’ जैसी फिल्म में बनारस आपके लिए कितना अहम रहा और शूटिंग के दौरान इस शहर ने आपको क्या महसूस कराया?
उत्तर: मेरे लिए बनारस इस फिल्म की सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि इसकी आत्मा है। यहां शूटिंग करते हुए शहर की संस्कृति, आस्था और लोगों का अपनापन लगातार महसूस हुआ। आयुष ने कहा कि गुजराती और मराठी किरदार निभाने के बाद अब वह एक ठेठ बनारसी किरदार में नजर आएंगे, जो उनके लिए एक नया और दिलचस्प अनुभव है।

प्रश्न: आजकल बहुत सा गाली-गलौज भरा और तेज कंटेंट आ रहा है। आप किस तरह का सिनेमा करना चाहते हैं?
उत्तर: मैं ऐसी फिल्में करना चाहता हूं, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके। मेरा मानना है कि सिनेमा ऐसा होना चाहिए, जो मनोरंजन भी दे और घर के हर सदस्य के लिए सहज भी हो। जिस कहानी में भावनाएं, मर्यादा और सच्चाई हो, वही लंबे समय तक याद रहती है।

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