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झांकी: चहेते अफसर पर संकट

अजय भट्टाचार्य

उत्तर प्रदेश में बाबाजी ने अपने चहेतों को मलाईदार पद बांटने के चक्कर में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून का मजाक बना दिया है। बाबाजी के सबसे चहेते अफसर को इलाहाबाद हाई कोर्ट अदालत ने आईना दिखा दिया है। यह अधिकारी इस समय गृह और सूचना जैसे बड़े विभागों का मुखिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस अफसर को किसी जिम्मेदार पद पर नहीं होना चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने बाबाजी के प्रिय अफसर माने जाने वाले अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है- आपने कानून का मज़ाक़ बनाकर रख दिया है।’ कोर्ट ने १९९५ बैच के इस आईएएस अफसर को किसी भी बड़ी जिम्मेदारी के लिए सही नहीं बताते हुए केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग तक को आदेशित कर दिया है कि ‘इनको जिम्मेदार पद देने से पहले विचार करें। ऐसे अफसर जब हाई कोर्ट को भ्रमित कर सकते हैं तो आम जनता का क्या हाल करते होंगे।’
प्राथमिक शिक्षा में पिछड़ा मप्र
नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष २०२४-२५ के सकल नामांकन अनुपात के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश पिछले एक दशक में प्राथमिक स्कूली बच्चों के दाखिले के मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। एक दशक पहले प्रदेश का प्राथमिक सकल नामांकन अनुपात करीब १०९.३ प्रतिशत हुआ करता था, जो अब लगभग ३० फीसदी गिरकर महज ७६.३ प्रतिशत पर सिमट गया है। देश के किसी भी बड़े राज्य में यह गिरावट सबसे बड़ी और चौंकाने वाली है। इस मामले में मप्र की स्थिति केवल बिहार (७७.२ प्रतिशत), गुजरात (७९.६ प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (८३.१ प्रतिशत) और राजस्थान (८८.३ प्रतिशत) जैसे राज्यों के समकक्ष या उनसे भी बदतर हो चुकी है।
महुआ बनाम विदेशी शराब?
गुजरात के राजनीतिक हलकों में भाजपा के एक पदाधिकारी द्वारा अपने परिवार से जुड़े होटल में विदेशी शराब परोसने का परमिट पाने की कोशिश की चर्चा है। उधर भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने हाल ही में केमिकल वाली जहरीली शराब के सुरक्षित विकल्प के तौर पर पारंपरिक महुआ शराब की वकालत की। कहा जा रहा है कि उस आवेदन में परिवार के पार्टी के साथ लंबे समय से जुड़े होने का जिक्र किया गया था। परमिट मिला या नहीं, यह तो साफ नहीं है, लेकिन शराब से जुड़ी इन दो अलग-अलग बातों का फर्क गुजरात की राजनीतिक चर्चाओं का पसंदीदा विषय बन गया है। आम जनता के लिए महुडा और खास के लिए विदेशी शराब!
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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