कविता श्रीवास्तव
देश में हर आठ मिनट में एक बच्चा गायब हो रहा है। यह एक चिंताजनक रिपोर्ट है। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी गहरी चिंता जताई है। न्यायालय ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि बड़ी संख्या में बच्चों का लापता होना कोई नई बात नहीं है। हमारे देश के हर प्रदेश में बच्चे गायब होने या अपहृत होने की घटनाएं हो रही हैं। अनेक गायब हुए बच्चे परिजनों को फिर कभी नहीं मिल पाते हैं। भारत में ही नहीं, बच्चों के गायब होने की मामले दुनियाभर में चिंताजनक हैं। पिछले दस वर्षों में देश की राजधानी में १.८ लाख से अधिक बच्चे लापता हुए हैं। इनमें से पचास हजार से अधिक का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आंकड़े बताते हैं कि लड़कों की तुलना में लड़कियां ज्यादा लापता होती हैं। बड़ी चिंता का सवाल यह है कि बच्चे खुद भागते हैं या उन्हें गलत काम के लिए अपहृत किया जाता है? कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि ज्यादातर उन्हें अपराधिक लोग यौन शोषण या बाल मजदूरी के लिए उठा ले जाते हैं। बच्चों को गोद लेकर भी उन्हें गायब कर दिया जाता है, क्योंकि हमारे देश में गोद लेने की प्रक्रिया ठीक नहीं है। इसी की आड़ में बच्चों की तस्करी होने की आशंका भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने भी कहा है कि देश में गोद लेने की प्रक्रिया जटिल है। अदालत ने केंद्र से इस प्रणाली को सरल बनाने को कहा है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी भी की है कि गोद लेने की प्रक्रिया कठोर होने के कारण, इसका उल्लंघन होना स्वाभाविक है। बड़ी संख्या में बच्चों के गायब होने के कई कारण हो सकते हैं। बताया गया कि बच्चे यौन शोषण, जबरन मजदूरी या अवैध गोद लेने की वजह से भाग जाते हैं। कई बार स्वेच्छा से भी घर से भाग जाते हैं। परिवार के सदस्यों या अपरिचितों द्वारा अपहरण और अन्य अनैच्छिक परिस्थितियां इसका कारण हो सकती हैं। बच्चों के भागने के मुख्य कारणों में घरेलू या स्कूल की समस्याएं, अपराधियों द्वारा उन्हें निशाना बनाया जाना या अन्य परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं, जिसके कारण वे घर छोड़कर भाग जाते हैं। इसके पीछे घर या स्कूल में तनाव, माता-पिता से दुर्व्यवहार या अन्य दबाव वाले कारण भी हो सकते हैं। कई बार दुर्घटनाओं में या प्राकृतिक आपदाओं के बाद बच्चे अपने परिवारों से बिछड़ जाते हैं। उनका कभी पता नहीं लगता और वे अनाथ हो जाते हैं। वे तस्करी गिरोहों और अवैध गोद लेने वालों का शिकार हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों के प्रति सामाजिक चेतना और जागरूकता बढ़ाने की सख्त आवश्यकता है। वर्तमान में सीसीटीवी, साेशल मीडिया व अन्य संसाधनों के कारण गायब हुए बच्चों को ढूंढने के कई उपाय उपलब्ध हैं। फिर भी बच्चों का गायब होना कम नहीं हो रहा है।
