मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : नशे के जाल में युवा पीढ़ी

तड़का : नशे के जाल में युवा पीढ़ी

कविता श्रीवास्तव

मुंबई सपनों का शहर है, लेकिन आज वह नशाखोरी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। हाल ही में गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग ओवरडोज से दो युवाओं की मौत हो गई। इस कार्यक्रम में लगभग ४,००० लोग शामिल हुए थे, जिन्होंने २००० रुपए तक की एंट्री फीस दी थी। इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद नशीले पदार्थों का खुलेआम इस्तेमाल प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह घटना नशाखोरी की बेखौफ मनमानी का उदाहरण है। हालांकि, वर्ष २०२६ के शुरुआती महीनों के जनवरी और फरवरी के बीच मुंबई पुलिस ने १५८ एनडीपीएस मामलों में २०२ लोगों को गिरफ्तार किया और करीब १०६ किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए, जिनकी कीमत लगभग
३०.९२ करोड़ रुपए आंकी गई। इनमें गांजा, मेफेड्रोन (एमडी), कोकीन और हेरोइन जैसी खतरनाक ड्रग्स शामिल थीं। ड्रग सेवन के ६७५ मामलों में ६०० से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई। इससे स्पष्ट है कि नशाखोरी की समस्या केवल तस्करी तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के भीतर गहराई तक पैâली हुई है। मार्च और अप्रैल में भी यह सिलसिला जारी रहा। हाल ही में शैंपू की बोतलों में छिपाई करीब ४ करोड़ रुपए की कोकीन एक्सप्रेस ट्रेन से जब्त की गई। एक अन्य कार्रवाई में २०० किलोग्राम से अधिक गांजा पकड़ा गया। इन घटनाओं से साफ है कि मुंबई में ड्रग्स का कारोबार अब संगठित और बहुस्तरीय नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें स्थानीय सप्लायर्स से लेकर अंतरराष्ट्रीय तस्कर तक शामिल हैं। नशाखोरी का बढ़ना केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक संकट भी है। युवा पीढ़ी में पार्टी कल्चर, नाइटलाइफ और सोशल मीडिया के प्रभाव से ड्रग्स को ‘स्टेटस सिंबल’ या ‘मौज-मस्ती’ का माध्यम समझा जा रहा है। लेकिन इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर और करियर का विनाश हो रहा है। असमय मौत भी हो रही है। नशाखोरी की लत को पूरा करने के लिए ही चोरी, हिंसा और अन्य अवैध गतिविधियां बढ़ती हैं। बढ़ते अपराधों के पीछे ड्रग्स की भूमिका चिंताजनक है।
इस गंभीर समस्या का हल ढूंढना पड़ेगा। बड़े आयोजनों में सख्त सुरक्षा व्यवस्था और ड्रग्स जांच अनिवार्य की जानी चाहिए। आयोजकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियों को तस्करी के नेटवर्क पर और कड़ा प्रहार करना होगा। सप्लाई चेन को तोड़ना होगा। दूसरी ओर, समाज और परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों के साथ खुला संवाद रखना चाहिए और उनके व्यवहार में बदलाव पर सतर्क रहना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में नशे के खिलाफ निरंतर जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।

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