राधेश्याम सिंह / वसई
वसई की 13 वर्षीय छात्रा काजल गौड़ की मौत मामले में गिरफ्तार शिक्षिका ममता यादव को गुरुवार को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद वसई-विरार में अनधिकृत स्कूलों का मुद्दा तूल पकड़ चुका है और इन पर तुरंत कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। शिक्षण विभाग ने भी गंभीरता दिखाते हुए सभी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून कड़ाई से लागू करने का निर्देश भेजा है। वसई के सातीवली स्थित श्री हनुमंत विद्यामंदिर में पढ़ने वाली काजल गौड़ को कथित रूप से शिक्षिका ममता यादव ने स्कूल में देर से आने पर पीठ पर बैग लादकर 100 उठक-बैठक की सज़ा दी थी।परिवार के अनुसार, शिक्षिका को पता था कि काजल बीमार और कमजोर है, फिर भी उसने यह अमानवीय दंड दिया। सज़ा के तुरंत बाद काजल की तबीयत बिगड़ती चली गई और बाद में उसकी मौत हो गई। वालीव पुलिस ने शिक्षिका पर सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की थी। गुरुवार को उसे अदालत में पेश करने पर 14 दिन की न्यायिक कोठडी में भेज दिया। इस कार्रवाई पर मृत छात्रा के पिता सिकंदर गौड़ ने स्कूल प्रशासन पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “पुलिस ने जो कार्रवाई की है,उससे हम खुश हैं। लेकिन सिर्फ शिक्षिका नहीं हेडमास्टर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। मेरी पत्नी जब शिकायत लेकर गई थी, तो हेडमास्टर ने उल्टा डांट दिया और कहा कि ऐसी शिकायतें लेकर मत आया करो।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन बच्ची की तबीयत को लेकर झूठे दावे कर रहा है। पिता ने भावुक होते हुए कहा,“अगर बच्ची की तबीयत खराब थी, तो फिर भी इतनी कठोर सज़ा क्यों दी गई ? हमारी बच्ची 13 साल की थी। आज जो हमारी बच्ची के साथ हुआ, स्कूल पर भी ऐसी ही कार्रवाई होनी चाहिए।“
हालांकि, वसई-विरार शहर में अनधिकृत स्कूलों की भरमार है। पिछले वर्ष 118 अनधिकृत स्कूलें थीं, कार्रवाई के बाद भी 34 स्कूल अभी भी चालू हैं। प्रशासन के ऐसे ही ढीलेपन की वजह से ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं। सरकार को तुरंत कड़ा एक्शन लेना चाहिए।” जिला शिक्षणाधिकारी सोनाली मातेकर ने स्पष्ट किया कि RTE कानून के अनुसार किसी भी छात्र को शारीरिक सज़ा देना अपराध है।उन्होंने सभी स्कूलों को पत्र जारी कर चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
