-सरकारी खजाने में सेंध, एजेंसियां बेखबर!
-१२ दिन की पुलिस हिरासत में आरोपी
जेदवी / मुंबई
देश की आयात-निर्यात व्यवस्था में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। नवी मुंबई के न्हावा-शेवा बंदरगाह से संचालित कथित अखरोट आयात घोटाले में करोड़ों रुपए की सीमा शुल्क चोरी का मामला सामने आने के बाद सरकारी निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि चीन, अमेरिका और चिली से आनेवाले अखरोटों को कागजों में अफगानिस्तान का उत्पाद बताकर सरकार को लगभग १३८.८४ करोड़ रुपए का चूना लगाया गया।
जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस की खुफिया इकाई द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन को-फाइंड’ के तहत इस रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। मामले में सूरत के कारोबारी स्नेह दीपकभाई काकड़िया को मुख्य मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया गया है। कुल पांच आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, चीन और अमेरिका से आने वाले अखरोटों को पहले यूएई के जेबेल अली बंदरगाह पहुंचाया जाता था। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के जरिए माल को अफगानिस्तान का बताकर भारत भेजा जाता था। इस फर्जीवाड़े का मकसद साफ्टा समझौते का लाभ उठाना था। जहां सामान्य तौर पर इन देशों से आयातित अखरोट पर करीब ११० प्रतिशत सीमा शुल्क देना पड़ता है, वहीं अफगानिस्तान मूल घोषित होने पर केवल ५ प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है। इसी अंतर का फायदा उठाकर करोड़ों रुपए की ड्यूटी चोरी की गई।
हाई कोर्ट का सख्त रुख
मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने जब्त माल को बिना शर्त छोड़ने से इनकार कर दिया। अदालत ने सशर्त राहत देते हुए २.७८ करोड़ रुपए की डिफरेंशियल ड्यूटी जमा करने अथवा समान राशि की बैंक गारंटी देने का निर्देश दिया। मुख्य आरोपी स्नेह काकड़िया को अदालत ने १२ दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अन्य आरोपियों से भी जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।
