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फडणवीस के करीबी फुके दंपति पर बैंक मेहरबान… आम लोग रुको, विधायकजी, १०० करोड़ रुपए का कर्ज लो!

– सिर्फ १५ एकड़ जमीन पर मिला ‘मेगा लोन’

– विपक्ष का हमला, ‘ये सत्ता का खुला दुरुपयोग’

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में ‘विकास’ का असली चेहरा अब बेनकाब हो गया है। जहां आम लोग मामूली खेती पर कर्ज के लिए बैंकों के चक्कर लगाते हैं, वहीं सिर्फ १५ एकड़ जमीन पर भाजपा के विधान परिषद सदस्य को १०० करोड़ रुपए का ‘मेगा लोन’ मिल गया। इससे बैंक का नजरिया ‘आम जनता रुकिए, पहले विधायकजी लोन लीजिए’ जैसा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विपक्ष ने इसे सत्ता का खुला दुरुपयोग और किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सीधा हमला बोला है।
राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले विधायक डॉ. परिणय फुके और उनकी पत्नी परिणीता फुके पर इस भारी-भरकम कर्ज को गलत तरीके से मंजूर कराने का गंभीर आरोप लगा है। दूसरी ओर स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले सामने आए इस घोटाले जैसे खुलासे ने भाजपा के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
जानकारी के मुताबिक, नागपुर स्थित वैâनरा बैंक की शाखा ने यह कर्ज ५ मार्च २०२४ को कृषि विकास परियोजना के नाम पर मंजूर किया। मौजा रनाला, तहसील कामठी के सर्वे नंबर १२९/१/१/४४ और १२९/१/१/६४ के तहत कुल करीब १५ एकड़ जमीन परिणीता फुके और अन्य के नाम पर दर्ज है। सातबारा रिकॉर्ड में परिणय और परिणीता फुके दोनों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन पर १०० करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। इस धनराशि का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जिन किसानों को १५ एकड़ पर २० लाख रुपए का कर्ज भी नहीं मिलता, वे अब पूछ रहे हैं कि क्या बैंक का दरवाजा सिर्फ नेताओं के लिए खुला है? किसान संगठनों ने इसे बैंकिंग सिस्टम में भेदभाव बताते हुए सवाल उठाया है कि आम किसानों को कागजी अड़चनें दिखाई देती हैं, लेकिन सत्ता से जुड़े लोगों के लिए नियम गायब हो जाते हैं।
सत्ता का खुला दुरुपयोग
इस प्रकरण पर विपक्षी दलों ने सरकार पर सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए तुरंत जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर फुके लोक स्वैâम हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में जनाक्रोश भड़क उठा है।
सत्तारूढ़ दल की फजीहत
राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक आने के साथ ही भाजपा के विधायक से जुड़ा यह मामला मतदाताओं में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है। लोगों का कहना है कि यह विकास नहीं, पक्षपात का चेहरा है, जहां किसान सूख रहे हैं, वहीं सत्ताधारी फल-फूल रहे हैं।

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