-मीरा-भायंदर मनपा और नेताओं के खिलाफ भारी नाराजगी
सुरेश गोलानी / भायंदर
पिछले लगभग ६ महीनों से भायंदर (पूर्व) के न्यू गोल्डन नेस्ट इलाके में रहनेवाले लोगों के लिए फुटपाथ पर चलना एक खतरनाक टास्क बन गया है। साइलेंट पार्क, नीरा कॉम्प्लेक्स जैसे दर्जनों निवासी संकुल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बीच फुटपाथ की अवस्था अत्यंत दयनीय बनी हुई है और हर रोज सैकड़ों लोग खासकर बच्चे, गर्भवती महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक गिरकर चोटिल हो रहें हैं।
मनपा के ठेकेदारों ने हाल ही में बिछाए गए पेवर ब्लॉक को आनन-फानन में बिना किसी ठोस कारण के उखाड़ दिया, जिसके कारण फुटपाथ पर लगे हुए मैनहोल के ढक्कन (कवर) जमीनी सतह से लगभग चार से पांच इंच ऊपर हो गए है। मैनहोल कवर का जमीन की सतह से ऊपर होने से पैदल चलनेवाले लोगों के लिए खतरनाक स्थिति बनी हुई है। इलाके में रहनेवाले निवासियों द्वारा की गई दर्जनों शिकायतों के बावजूद मीरा-भायंदर महानगरपालिका प्रशासन के लोक निर्माण विभाग और स्थानिक प्रभाग कार्यालय से जुड़े अधिकारी पिछले ६ महीने से कुंभकरण की नींद में सोए हुए हैं। मनपा प्रशासन और प्रभाग के पूर्व भारतीय जनता पार्टी के नगरसेवकों पर लापरवाही और नागरिकों पर मंडरा रहे इस जानलेवा खतरे को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए स्थानिक निवासी सूरज यादव का कहना है कि अक्सर लोग इन कवरों से टकराकर अपना संतुलन खोकर गिरते हैं और चोटिल हो जाते हैं तो दूसरी तरफ सत्ता के लोभी नगरसेवक सिर्फ चुनावी मौसम में लोगों से वोट मांगते नजर आते हैं और उसके बाद गायब हो जाते हैं। अगर फुटपाथों को ठीक नहीं किया गया तो नागरिकों ने मनपा के खिलाफ तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
लापता हैं भाजपा के नगरसेवक
मनपा का कार्यकाल करीब तीन साल पहले खत्म हो गया। मनपा में प्रशासक की नियुक्ति के बाद जनता उपेक्षा की शिकार हो रही है। न तो स्थानीय नगरसेवक जनता की समस्याओं की तरफ ध्यान दे रहे हैं न ही मनपा प्रशासक।
लोगों का कहना है कि सिर्फ चुनाव के समय दिखनेवाले नगरसेवक तो ऐसे गायब हैं जैसे गधे के सिर से सिंग। बताया जाता है कि क्षेत्र के नगरसेवक हसमुख गहलोत, डिंपल मेहता और और अरविंद शेट्टी कभी नजर नहीं आते हैं। जनता फुटपाथ, पानी जैसी समस्या से जूझ रही है।
लोगों का कहना है कि मनपा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन नगरसेवकों को फंड मिलना बंद हो गया, जिसके कारण इनकी कमाई के रास्ते भी बंद हो गए, इसलिए तीनों नगरसेवक भूमिगत हो गए हैं। अब चुनाव आनेवाला है, ये तीनों शायद फिर नजर आएं।
