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डगमगा रही देश की आर्थिक नाव…६० प्रतिशत महंगा हो गया डॉलर!.. १२ वर्षों में पहुंचा ५९ से ९७ रुपए पर

सामना संवाददाता / मुंबई

पिछले १२ वर्षों में रुपए की हालत को एक पंक्ति में कहें तो डॉलर के सामने ५९ रुपए के आसपास से फिसलकर ९९–९७ तक पहुंच गया है। यानी जो डॉलर २०१४ में करीब ५९ रुपए में मिलता था, उसके लिए आज लगभग ९५ रुपए देने पड़ रहे हैं। जानकारों के अनुसार, इस दौरान रुपया करीब ६० फीसदी गिरा है।
आरबीआई के वार्षिक औसत आंकड़ों में २०१४-१५ में डॉलर का औसत भाव करीब ६१.१४ रुपए था, जबकि २०२४-२५ में यह ८४.५८ रुपए हो चुका था; २०२६ में बाजार भाव ९५ रुपए के आसपास पहुंच गया है। २०१४ के करीब ५९ रुपए प्रति डॉलर से २०२६ के करीब ९६ रुपए प्रति डॉलर तक जाने का मतलब है कि डॉलर खरीदना लगभग ६० प्रतिशत महंगा हो गया। दूसरी तरफ रुपए की डॉलर में वास्तविक कीमत देखें तो एक रुपया पहले जितने डॉलर खरीद सकता था, आज उससे करीब ३७ प्रतिशत कम खरीद पाता है।
रुपया कमजोर होने से आयात होता है महंगा!
हिंदुस्थान कच्चा तेल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, खाद, दवाओं के कच्चे माल और कई औद्योगिक वस्तुएं बाहर से खरीदता है। रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगे होते हैं, फिर उसका असर पेट्रोल-डीजल, रसोई, परिवहन, बिजली, निर्माण लागत और अंतत: आम आदमी की थाली तक पहुंचता है। २०२६ में रुपए पर दबाव के पीछे महंगा कच्चा तेल, व्यापार घाटा, पूंजी निकासी और डॉलर की मांग जैसे कारण बताए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मई २०२६ में रुपया ९६.३८ प्रति डॉलर के करीब चला गया था और अप्रैल २०२६ में यह ९५.३३ के रिकॉर्ड निचले स्तर तक भी फिसला था।
बता दें कि मई २०१४ में १ डॉलर का औसत भाव करीब ५९.२९ रुपए था। मई २०१४ में डॉलर-रुपया दर का दायरा लगभग ५८.४० से ६०.२९ रुपए के बीच रहा था। १ जून २०२६ को रुपया करीब ९४.९९ रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यानी मई २०१४ से जून २०२६ तक १ डॉलर ५९.२९ से बढ़कर ९४.९९ रुपए हो गया। इसका सीधा मतलब है कि डॉलर खरीदना लगभग ६० प्रतिशत महंगा हो गया।
एक तिहाई घटी खरीद क्षमता
दूसरे शब्दों में, मई २०१४ में जिस डॉलर के लिए ५९ रुपए देने पड़ते थे, आज उसी डॉलर के लिए करीब ९५ रुपए देने पड़ रहे हैं। रुपए की वास्तविक ताकत देखें तो २०१४ की तुलना में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग ३७–३८ प्रतिशत कमजोर हो चुका है। यानी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रुपए की खरीद क्षमता करीब एक-तिहाई से अधिक घट गई है।

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