सामना संवाददाता / नई दिल्ली
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि देश में अब तक ९०० से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें १०१ मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। लगातार बढ़ते संक्रमण और हिंसा की वजह से हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयेसस ने बताया कि इबोला का सबसे ज्यादा असर डीआरसी के इतुरी प्रांत में देखा जा रहा है। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और संघर्ष से प्रभावित है।
उधर, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला के बढ़ते प्रकोप के बीच भारत सरकार ने भी इसके बाद २१ मई को इसको लेकर देश के राज्यों को एक दिशा-निर्देश जारी किए थे।
इसी क्रम में पुणे में विदेश से आने वाले यात्रियों की अब पुणे एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। एयरपोर्ट पर यात्रियों की इबोला जांच की जा रही है। खासकर, दुबई और बैंकॉक से आनेवाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट पर अब तक की गई स्क्रीनिंग के दौरान इबोला का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को एक अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। इसी दिशा में पुणे एयरपोर्ट पर एहतियाती उपाय लागू किए जा रहे हैं।
`डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि लगातार हिंसा और असुरक्षा की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों और राहत एजेंसियों का काम बेहद कठिन हो गया है। कई स्वास्थ्यकर्मी और मदद करने वाले लोग भी जान बचाने के लिए इलाके से भाग रहे हैं। ऐसे में संक्रमित मरीजों की पहचान करना और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।’
