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महाराष्ट्र में ‘जामताड़ा मॉडल’ का काला साम्राज्य…सत्ता की छाया में चल रही लूट!

 राजन पारकर

देश में ऑनलाइन ठगी का जाल तेजी से फैल रहा है, लेकिन अब महाराष्ट्र भी इस गोरखधंधे का नया गढ़ बनता जा रहा है। जिस प्रकार जाम तारा देशभर में ठगी का अड्डा बन चुका है, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में बोगस कॉल केंद्रों के माध्यम से देश-विदेश के नागरिकों को ठगकर करोड़ों रुपये की लूट की जा रही है। यह गंभीर आरोप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने लगाया है।
सत्ता का संरक्षण या मिलीभगत?
गांधी भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में सपकाळ ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि इस पूरे रैकेट में वरिष्ठ अधिकारी दत्ता कराले सहित दो पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय के छठे माले का आशीर्वाद मिले बिना इतने बड़े स्तर पर यह अवैध धंधा चलना संभव नहीं है। सवाल यह उठता है कि क्या शासन व्यवस्था खुद इस काले खेल की भागीदार बन चुकी है? क्या आम जनता की सुरक्षा अब केवल कागजों तक सीमित रह गई है?
जांच एजेंसी सक्रिय, राज्य तंत्र निष्क्रिय क्यों?
सीबीआय ने अगस्त और सितंबर २०२५ में नाशिक और इगतपुरी में छापेमारी कर इस रैकेट का पर्दाफाश किया। कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया।लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा था, तब राज्य की पुलिस क्या कर रही थी?क्या यह लापरवाही थी या जानबूझकर आंखें मूंदी गई थीं?क्या इस पूरे खेल में अंदरूनी सांठगांठ है? यह प्रश्न अब जनता के मन में घर कर चुके हैं।
पोस्टिंग बदली, लेकिन धंधा वहीं!
सपकाल ने यह भी दावा किया कि जिन क्षेत्रों में संबंधित अधिकारी तैनात रहे-ठाणे, पालघर, रायगढ़ और बाद में नाशिक-उन्हीं क्षेत्रों में यह बोगस कॉल केंद्र फलते-फूलते रहे। पहले मामूली कार्रवाई दिखाकर आरोपियों को छोड़ दिया गया और बाद में उन्हीं के साथ मिलकर यह रैकेट खड़ा किया गया-ऐसा आरोप सामने आया है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध कारोबार को सुचारु रूप से चलाने के लिए नकद, सोना और डिजिटल मुद्रा के रूप में भारी रिश्वत दी जाती थी।
मुख्यमंत्री से सीधा सवाल
सपकाळ ने राज्य के मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधा सवाल किया है कि क्या इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर हमेशा की तरह उन्हें बचा लिया जाएगा?
भोंदूबाबा कड़ी भी जांच के घेरे में
इस पूरे मामले में तथाकथित बाबा अशोक खरात और संबंधित अधिकारियों के बीच संबंधों की भी जांच की मांग की गई है। क्या इस रैकेट के माध्यम से काला धन सफेद किया जा रहा था? यह भी एक बड़ा प्रश्न बनकर उभरा है।
राजनीतिक बयान भी गरमाए
सपकाळ ने विधान परिषद को लेकर भी स्पष्ट किया कि यदि शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे उम्मीदवार नहीं बनते हैं, तो कांग्रेस को मौका मिलना चाहिए।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस का रुख हमेशा सकारात्मक रहा है, जिसे राहुल गांधीऔर मल्लिकार्जुन खरगे पहले ही स्पष्ट कर चुके है
-क्या महाराष्ट्र अब ठगों का स्वर्ग बन चुका है?
-क्या सत्ता की छाया में जनता को लूटा जा रहा है?
अगर यह आरोप सच हैं, तो यह केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।अब देखना यह है कि सच सामने आता है या फिर यह मामला भी अंधेरे में दबा दिया जाएगा!

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