मुख्यपृष्ठनए समाचार‘मेवाभाऊ’ का विकसित राज्य निकला ‘गड्ढा महाराष्ट्र’

‘मेवाभाऊ’ का विकसित राज्य निकला ‘गड्ढा महाराष्ट्र’

-मुंबई से मराठवाड़ा तक की टूटी सड़कों से दिखा ‘विकास’ का मुखौटा!

– टोल चालू, मरम्मत बंद, दलदल में समार्इं सड़कें

-मोदी, गडकरी, फडणवीस और शिंदे पर बरसी जनता

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

‘मेवाभाऊ’ के ‘विकसित महाराष्ट्र’ का सच अब सड़कों के गड्ढों में साफ दिखाई दे रहा है। उनका यह दावा अब जनता की नजरों में ‘गड्ढा महाराष्ट्र’ बन गया है। राज्यभर में सड़कों की हालत दयनीय है। मुंबई से लेकर मराठवाड़ा तक टूटी सड़कें और दलदल में बदलते रास्ते यह बता रहे हैं कि विकास सिर्फ भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित रह गया है। मुंबई, ठाणे, नासिक, नागपुर और पुणे जैसे बड़े शहरों की गलियों से लेकर हाईवे तक जगह-जगह गड्ढे, दरारें और धंसी सड़कों ने सरकार के ‘विकास’ के दावे की पोल खोल दी है। टोल बूथ चालू हैं, लेकिन मरम्मत पर अजीब सी खामोशी है। इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जनआक्रोश फूट पड़ा है, जहां जनता मोदी, गडकरी, फडणवीस और शिंदे सरकार पर लानत बरसाते हुए भ्रष्ट, नाकाम और दिखावटी ‘गड्ढा विकास’ का ठप्पा लगा दिया है।
उल्लेखनीय है कि राज्यभर में नागरिकों का गुस्सा अब सड़कों की तरह ही फूट पड़ा है। गड्ढा महाराष्ट्र ट्रेंड के तहत बड़ी संख्या में वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें सड़कें नहीं बल्कि खाई जैसी गहराइयां नजर आ रही हैं। मुंबई के ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, ठाणे का घोडबंदर रोड, पुणे का वारजे-हिंजवडी मार्ग और नासिक की त्र्यंबक रोड हर जगह गड्ढों ने विकास की ‘दमदार कहानी’ की धज्जियां उड़ा दी हैं। ऐसे में महाराष्ट्र की टूटी-फूटी सड़कों ने सोशल मीडिया पर बगावत खड़ी कर दी है। ट्विटर (एक्स) पर सैकड़ों यूजर्स ने गड्ढों, भ्रष्टाचार और नेताओं की बेरुखी पर खुलकर नाराजगी जताई।
जनता ने पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तक को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। किसी ने सरकार की विकास की परिभाषा पर सवाल उठाया तो किसी ने लाडली बहन योजना पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि वोट खरीद लिए, सड़कें बेच दीं। जनता का कहना है कि टोल की वसूली बंद करो, वरना गड्ढों की तस्वीरें ही सरकार की पहचान बनेंगी।
यह सड़क नहीं, गड्ढों का जाल है
 यूजर्स ने महाराष्ट्र की सड़कों को एडवेंचर ऑफ-रोडिंग ट्रैक और मंगल ग्रह की सतह बताया। एक यूजर धीरज दंडगवाल ने लिखा है कि जो नेता ६० किमी प्रति घंटे की रफ्तार से संभाजीनगर से अहिल्यानगर तक गाड़ी चला ले, उसे एक लाख रुपए दूंगा।
 दूसरे ने कहा कि यह है मोदी-गडकरी-फडणवीस के ‘विकसित महाराष्ट्र’ का असली चेहरा। भाजपा के कट्टर समर्थक गोविंद कुलकर्णी ने भी स्वीकार करते हुए कहा कि अब फर्क नहीं पड़ता कौन सत्ता में है, सड़कें सबने छोड़ दीं। सभी एक जैसे हैं।
 एक अन्य यूजर तुषार नरावडे ने कहा है कि महाराष्ट्र के लगभग हर रास्ते की यही दुर्दशा है। इस हालत के लिए नरेंद्र मोदी, नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस ही जिम्मेदार हैं। लेकिन अंधभक्त लोग सिर्फ देवेंद्र के नाम पर ढोल पीटने में व्यस्त हैं। जब उनके अपने परिवार के लोग ऐसे ही सड़कों पर हादसे में मरेंगे, तब समझ आएगा।

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