मुख्यपृष्ठनए समाचार३ महीनों में ही ‘कंगाल’ हो गई ‘ईडी’ सरकार!

३ महीनों में ही ‘कंगाल’ हो गई ‘ईडी’ सरकार!

-अधिवेशन के पहले दिन ही ५८,००० करोड़ की अतिरिक्त मांग

-जनता का सवाल; कैसे चलेगा पूरा साल?

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य की महायुति सरकार में शामिल तीनों दलों के बीच जमकर खींचतान शुरू है। फंड की हेरा फेरी और कटौती को लेकर कई मंत्री नाराज हैं। ऐसे में भाजपा और शिंदे गुट के मंत्रियों की नाराजगी मिटाने और उनकी मांगों को देखते हुए सरकार में मानसून सत्र के पहले दिन ही ५८ हजार करोड़ रुपए के अनुपूरक (अतिरिक्त) बजट की मांग की है। तीन महीने में ही सरकार का बजट खत्म हो गया और वह ‘कंगाल’ हो गई है। अब जनता पूछ रही है कि तीन महीने में ही सरकार कंगाल वैâसे हो गई? अगर सरकार को तीन महीने में ही अतिरिक्त ५८ हजार करोड़ की जरूरत पड़ गई तो फिर बजट में क्या प्रावधान किया गया था। इसका मतलब है कि बजट का मैनेजमेंट व्यवस्थित नहीं है।
खत्म हो गया ईडी सरकार के विकास का फंड!
कल से महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू हो गया है। सरकार का कहना है कि उसके पास विकास के लिए फंड नहीं है और उसे गत बजट के अलावा और अतिरिक्त पैसा चाहिए। इसके तहत राज्य के उप मुख्यमंत्री तथा वित्त और योजना मंत्री अजीत पवार ने विधानसभा में ५७,५०९ करोड़ ७१ लाख रुपए की अनुपूरक मांग का प्रस्ताव पेश किया।
असल में सरकार के अनुसार, राज्य में सड़कों, मेट्रो, सिंचाई परियोजनाओं जैसे आधारभूत प्रकल्पों, सिंहस्थ कुंभ मेले की योजना और कार्यान्वयन, महात्मा ज्योतिराव फुले आरोग्य योजना, संजय गांधी निराधार अनुदान योजना तथा पिछड़े विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति तथा कमजोर और वंचित समाज के विकास के लिए फंड नहीं है। इस मांग में से १९,१८३ करोड़ ८५ लाख रुपए अनिवार्य खर्चों के लिए, ३४,६६१ करोड़ ३४ लाख रुपए योजनागत कार्यक्रमों के तहत प्रस्तावित हैं। कुल अनुपूरक मांग की राशि ५७,५०९ करोड़ ७१ लाख रुपए में से ४०,६४४ करोड़ ६९ लाख रुपए आवश्यक श्रेणी में रखा गया है। इसमें सबसे अधिक ११,०४२ करोड़ ७६ लाख रुपए की राशि पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, अनुदान हेतु खर्च की जाएगी।

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