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सिर्फ कागजों पर ही सरपट दौड़ रही ‘ईडी’ सरकार की गाड़ी … ९ महीनों में जारी कर डाले १४,५९० जीआर! …धरातल पर मामला टांय-टांय फिस्स

-विकास निधि को तरस गए विधायक
– कई परियोजनाएं पड़ी हैं ठप

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
‘ईडी’ सरकार की गाड़ी कागजों पर ही सरपट दौड़ रही है। सरकार गत नौ महीनों में १४,५९० जीआर जारी कर चुकी है। कोई भी काम सही तरीके से नहीं हो रहा है। कागजों पर विकास की झड़ी लगाने वाली सरकार धरातल पर टांय-टांय फिस्स साबित हो रही है।
बताया गया है कि इस सरकार ने रोजाना औसतन ४० जीआर जारी किए गए हैं, लेकिन सरकार का खजाना खाली होने से बड़ी संख्या में जीआर का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इससे जनता के हाथ सिर्फ मायूसी लग रही है। दूसरी तरफ विकास निधि के बिना विधायक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, तो कई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया
रु.७० हजार करोड़
की १० योजनाएं!
किस्तों में मिल रहा है थोड़ा-थोड़ा फंड

‘ईडी’ सरकार ने ९ महीने में १४,५९० जीआर जारी किए हैं। मगर पैसे के अभाव में कोई भी योजना सही तरीके से नहीं चल रही है। सरकार का हाल आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया वाला है। इनमें से १० बड़ी योजनाओं का बजट ७० हजार करोड़ रुपए है।
महायुति सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री लाडली बहन, मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना, लेक लाडली, मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना, मुख्यमंत्री वयोश्री योजना, मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षण योजना जैसी १० बड़ी व्यक्तिगत लाभ वाली योजनाएं शुरू कीं। राज्य के खजाने पर बाहरी कर्ज का बोझ बढ़ने के बीच इन नई योजनाओं का खर्च पूरा करना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। इसी कारण पहले से मंजूर कामों को बड़े पैमाने पर संशोधित प्रशासनिक मंजूरी दी जा रही है और मंजूर कामों के लिए फंड भी टुकड़ों में ही दिया जा रहा है।
‘ईडी’ २.० सरकार गत ५ दिसंबर को बनी थी। तभी से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास गृह, ऊर्जा, विधि व न्याय, सामान्य प्रशासन और जनसंपर्क विभाग हैं। उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के पास वित्त व योजना और राज्य उत्पादन शुल्क विभाग है, जबकि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास नगर विकास, गृहनिर्माण और सार्वजनिक निर्माण विभाग हैं। लेकिन व्यक्तिगत लाभ वाली योजनाओं के कारण खजाने में कंगाली छा गई है, जिससे शिकायतें मिलने लगी हैं कि विधायकों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त निधि नहीं मिल रही। दूसरी तरफ अतिवृष्टि से प्रभावित लगभग १२ लाख किसानों की १५ लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
शासनादेश जारी करने में ‘ये’ विभाग अव्वल
 जल आपूर्ति व स्वच्छता विभाग
 सामान्य प्रशासन विभाग
 गृह विभाग
 उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग
 नगर विकास विभाग
 राजस्व व वन विभाग
 ऊर्जा, उद्योग व मजदूर विभाग

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