-भाजपा विधायक ने प्रशासन को कटघरे में किया खड़ा
सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे में शुरू किया गया ५० ‘आपला दवाखाना’ अब सिर्फ एक मजाक बनकर रह गया है। मौजूदा समय में १० को छोड़कर बाकी ४० दवाखाने बंद हो गए हैं, इनमें से कई को व्यावसायिक दुकानों में बदल दिया गया है, जिनमें से एक में कथित तौर पर साड़ी की दुकान खोली गई है। शिंदे के गढ़ ठाणे शहर की सेहत पर मानों लॉक लग गया है। आरोप लग रहे हैं कि कुप्रबंधन, बकाया वेतन और भ्रष्ट ठेका इस परियोजना के फेल होने के मुख्य कारण बने, जिससे जनता बेहाल है। इस पूरे मामले में महायुति में शामिल भाजपा के ही विधायक संजय केलकर ने मनपा को कटघरे में खड़ा कर दिया और कुप्रबंधन के लिए प्रशासन की घेराबंदी करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
उल्लेखनीय है कि ठाणे की आबादी २६ लाख पार कर गई है। इसमें से आधी यानी करीब ५२ प्रतिशत से ज्यादा लोग झोपड़ियों में रहते हैं। स्वास्थ्य मानदंडों के अनुसार हर ३०,००० से ४०,००० लोगों पर एक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए। हालांकि, ठाणे में एक स्वास्थ्य केंद्र लगभग १.५ लाख लोगों की जरूरतों को पूरा कर रहा है। इस बोझ को कम करने के लिए दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर ठाणे में भी ५० स्थानों पर ‘आपला दवाखाना’ शुरू किया गया, जिन्हें ‘वंदनीय हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना’ नाम दिया गया था। इसके जरिए शहर के विभिन्न स्थानों पर रोगियों को मुफ्त दवा उपचार, ईसीजी, रक्त जांच और दवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन प्रशासन द्वारा दिया गया था। इस परियोजना का संचालन बंगलुरु स्थित कंपनी मेडऑनगो द्वारा किया गया था, जिसे इलाज किए गए प्रत्येक मरीज के लिए १५० रुपए का भुगतान किया जाता था। हालांकि, यह मुफ्त स्वास्थ्य योजना अब ठप पड़ गई है। ठाणे के खोपट स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित ‘जनसेवक जनसंवाद’ नामक नागरिक संवाद कार्यक्रम के दौरान कई निवासियों और कर्मचारियों ने विधायक संजय केलकर के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं। दवाखानों में सेवारत पूर्व कर्मचारियों और नर्सों ने बताया कि अगस्त में केंद्र अचानक बंद कर दिए गए, जबकि कंपनी का अनुबंध अक्टूबर तक था। कई लोगों ने बताया कि उन्हें पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे वे बेरोजगार हैं और त्योहारों के मौसम में उन्हें काफी परेशानी हो रही है।
मनपा पर विरोध मोर्चे की दी चेतावनी
केलकर ने मनपा प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं किया है और मनपा के निर्देशों की अनदेखी की है। मनपा की ओर से दावा है कि उसने मेडऑनगो पर ५६ लाख रुपए का जुर्माना लगाया है, लेकिन कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया है। प्रशासन को यह राशि वसूल करनी चाहिए और प्रभावित कर्मचारियों का बकाया वेतन जारी करना चाहिए। अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो हम मनपा मुख्यालय तक मोर्चा निकालेंगे।
